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नौकरीपेशा लोगों ने कारपूलिंग को अपनाया, सोने की खरीदारी हुई कम

-ईंधन और विदेशी मुद्रा बचत के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान का लोग करने लगे पालनमध्य पूर्व में तनाव के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत और सोने की खरीद को लेकर किए आह्वान का असर दिखने लगा है।...

Wed, 13 May 2026 07:46 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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 नौकरीपेशा लोगों ने कारपूलिंग को अपनाया, सोने की खरीदारी हुई कम

-ईंधन और विदेशी मुद्रा बचत के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान का लोग करने लगे पालन मध्य पूर्व में तनाव के चलते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत और सोने की खरीद को लेकर किए आह्वान का असर दिखने लगा है। उनकी बात मानते हुए लोगों ने आने-जाने के लिए निजी वाहन छोड़ सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है। साथ ही नौकरीपेशा लोगों ने घर से ऑफिस जाने के लिए कारपूलिंग की व्यवस्था को अपना लिया है।सर्राफा बाजार में ग्राहकों की कमी होने लगी है, जिससे इसके कारोबारी चिंतित दिखाई दिए।पेश है रिपोर्ट...ऑफिस जाने के लिए कारपूलिंग का लिया सहारास्थान: आईपी एक्सटेंशनसमय: दोपहर 12:30 बजेप्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी साफ नजर आने लगा है।

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राजधानी के कई इलाकों में लोग अब कारपूलिंग को अपनाकर न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत कर रहे हैं, बल्कि अपने खर्चों में भी कटौती कर रहे हैं। आईपी एक्सटेंशन निवासी हेमंत अग्रवाल ने बताया कि उनकी ग्रेटर नोएडा स्थित कंपनी में काम करने वाले चार सहयोगी अलग-अलग अपार्टमेंट में रहते हैं। पहले सभी अपने-अपने वाहन से दफ्तर जाते थे, जिससे ईंधन की खपत और खर्च दोनों ज्यादा होते थे। लेकिन अब उन्होंने कारपूलिंग का तरीका अपनाया है। अब चारों सहकर्मी बारी-बारी से एक दिन एक ही व्यक्ति की कार से ऑफिस जाते हैं। इससे न केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि किसी एक व्यक्ति पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि सभी का ऑफिस समय भी लगभग एक जैसा है, इसलिए सुबह एक साथ निकलना और शाम को एक ही गाड़ी से वापस लौटना सुविधाजनक हो गया है। हेमंत ने बताया कि उनकी कंपनी जल्द ही वर्क फ्रॉम होम नीति लागू करने जा रही है, जिससे आने-जाने की परेशानी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। तब तक कारपूलिंग उनके लिए एक बेहतर और किफायती विकल्प बना हुआ है।-------जनपथ में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की बढ़ी चमकसमय: दोपहर 3 बजेस्थान: जनपथदिल्ली के जनपथ बाजार में इन दिनों रौनक तो है, लेकिन इस बार ट्रेंड थोड़ा बदला हुआ दिखाई दे रहा है। सोने की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है, जिसका असर अब ज्वेलरी मार्केट पर साफ दिखने लगा है।जनपथ स्थित आर्टिफीशियल ज्वेलरी की दुकान में ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है। दुकानदार विक्रम सिंह ने बताया कि सोने के गहनों की बजाय हल्की डिजाइनर ज्वेलरी और आर्टिफिशियल सेट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। खासकर युवतियां ऑक्सीडाइज्ड, कुंदन और सिल्वर-पॉलिश ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रही हैं। ग्राहकों का कहना है कि कम कीमत में बेहतर डिजाइन और शादी के हर फंक्शन के लिए अलग-अलग लुक मिल जाने से आर्टिफिशियल ज्वेलरी अब पहली पसंद बनती जा रही है।-----पेट्रोल पंप पर सामान्य दिखी स्थितिस्थान : नौरोजी नगरसमय : दोपहर 1 बजेपेट्रोल पंप पर वाहन चालक सामान्य रूप से पेट्रोल व डीजल भरवाते दिखे। पेट्रोल पंप पर दोपहिया व चार पहिया वाहनों की कोई कतार देखने को नहीं मिली। इसी तरह की स्थित यशवंत पैलेस स्थित पेट्रोल पंप पर भी नजर आई। लोग सामान्य तरीके से पेट्रोल भरवा रहे थे। पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने बताया कि अभी किसी भी तरह की पैनिक स्थिति नहीं है। न ही किसी तरह का कोई आदेश आया है। कर्मचारी सुरेंद्र यादव ने कहा कि जिसको जितना पेट्रोल भरवाना है वह भरवा सकता है। लेकिन, उन्होंने कहा कि जिस तरह पीएम नरेंद्र मोदी ने अपील की है, उसका ध्यान रखा जा रहा है। पेट्रोल भरवाने आए हेमंत सिंह ने कहा कि अभी किसी तरह की पेट्रोल की कमी नहीं है। लेकिन, भविष्य में जरूरत पड़ने पर वाहन में पेट्रोल होना जरूरी है। ऐसे में वह पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे।-----पेट्रोल पंप पर स्थिति सामान्य, इक्का दुक्का वाहन पेट्रोल लेने पहुंच रहेसमय : दोपहर 2.30 बजेस्थान : गोविंदपुरी स्थित एचपी पेट्रोल पंपप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया आह्वान और अपील का राजधानी में स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। किसी भी तरह की अफवाहों और पैनिक से दूर गोविंदपुरी स्थित एचपी पेट्रोल पंप पर स्थिति पूरी तरह से शांत और सामान्य नजर आ रही है।पेट्रोल पंप पर न तो वाहनों की लंबी कतारें हैं और न ही सीएनजी भरवाने के लिए कोई विशेष भीड़ उमड़ रही है। पंप पर फिलहाल इक्का-दुक्का वाहन ही अपनी नियमित जरूरत के हिसाब से ईंधन लेने पहुंच रहे हैं। पंप पर मौजूद कर्मचारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद जनता ने समझदारी और संयम का परिचय दिया है। बेवजह की भीड़ न होने से ईंधन वितरण की व्यवस्था पूरी तरह सुचारू और बाधारहित बनी हुई है।--- कोट ---पंप पर स्थिति बिल्कुल सामान्य है। ईंधन लेने के लिए ग्राहकों के बीच किसी भी प्रकार की कोई भीड़-भाड़ या अफरा-तफरी नहीं हो रही है।--- बब्लू, पंपकर्मीसुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में भी हालात आम दिनों की तरह ही रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों के बीच ईंधन को लेकर पैनिक जैसी कोई स्थिति नहीं है।--- जितेंद्र, पंपकर्मी------सोना और हुआ महंगा, सराफा बाजार से ग्राहक नदारदस्थान: कूंचा महाजनी, चांदनी चौकसमय: 4 बजेआयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने और महंगा हो गया। इस वजह से दिल्ली में सोने की कीमत प्रति दस ग्राम 1.65 लाख को पार कर गया। इस वजह से सराफा बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ गई है। कारोबारियों में भी मायूसी का माहौल दिखा। आभूषण कारोबारी सरकार की तरफ निगाहें लगाए बैठे हैं। ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (पंजीकृत) कूंचा महाजनी के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने बताया कि बाजार में सोने के आभूषण के ग्राहक बिल्कुल नहीं। 16 मई से अगले एक माह तक शादियों का समय नहीं है। इस वजह से बाजार और ठंडा रहेगा। नए ऑर्डर अभी खास नहीं मिल रहे हैं। द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल पलवल ने बताया कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद पिछले दिन के मुकाबले सोना प्रति दस ग्राम 12-13 हजार महंगा हो गया है।इस वजह से 24 कैरेट के दस ग्राम सोने की कीमत करीब 1.66 हजार रही। सोना की कीमतें अधिक होने से बाजार में पहले से ही कारोबार कम हो गया था। अब कारोबार ज्यादा प्रभावित हुआ है। बाजार में ग्राहक नहीं हैं।-----मेट्रो में बढ़ सकती है भीड़सरकार ने पेट्रोल, डीजल बचाने के मकसद से सार्वजनिक परिवहन लोगों से सफर अधिक करने की अपील की है। इससे मेट्रो में भीड़ बढ़ सकती है। सुबह-शाम व्यस्त समय में मेट्रो में यात्रियों की भीड़ भी हो रही है लेकिन दोपहर में मेट्रो में खास भीड़ नहीं देखी गई। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का कहना है कि अभी सामान्य दिनों की तरह ही भीड़ हो रही है। मेट्रो में प्रतिदिन औसतन 65-70 लाख यात्राएं यात्री करते हैं। पैसेंजर जर्नी अभी इसके आसपास ही है। संभावना जताई जा रही है कि निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन में सफर करने के सरकार की अपील का अगले कुछ दिनों में असर दिखेगा और मेट्रो में भीड़ बढ़ेगी। डीएमआरसी का कहना है कि दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में 350 ट्रेनें हैं। व्यस्त समय में औसतन तीन मिनट के अंतराल पर मेट्रो उपलब्ध होती है। इसलिए अधिकतम फ्रिक्वेंसी पर मेट्रो का परिचालन हो रहा है। मेट्रो अभी जितने यात्री सफर कर रहे हैं उससे अधिक यात्रियों का बोझ उठाने के लिए तैयार है।------पीडब्ल्यूडी ने सप्ताह में एक दिन लागू किया ‘नो कार डे’-प्रधानमंत्री की अपील पर अमल करते हुए 11 बिंदुओं में निर्देश जारी किए-नो कार डे के दिन अधिकारी सार्वजनिक वाहन व कारपूलिंग करके आएंगेनई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर ईंधन बचाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों को 11 बिंदुओं में निर्देश जारी किए हैं। इसमें सप्ताह में एक दिन ‘नो कार डे’ लागू किया गया है। इस दिन अधिकारी व कर्मचारी कार का उपयोग नहीं करेंगे। वे सार्वजनिक परिवहन या साझा (पूल्ड) परिवहन व्यवस्था का उपयोग कर कार्यालय आएंगे और जाएंगे। साथ ही निजी और आधिकारिक विदेश यात्रा करने पर रोक लगा दी गई है। जिनको पूर्व में स्वीकृति मिल गई थी, उनको रद कर दिया गया है। निर्देशों की साप्ताहिक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।विभाग की ओर से जारी निर्देशों में अधिकारियों को पेट्रोल व डीजल की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को अपनाने को कहा गया है। निरीक्षण और आधिकारिक कार्यक्रमों में अलग-अलग कारों के बजाए एक साथ इलेक्ट्रिक वाहन, सार्वजनिक वाहन और साझा वाहनों में यात्रा करने का निर्देश दिया है। विभाग के बेड़े में जल्द इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने और सभी कार्यालयों में ईवी चार्जर लगाने को कहा गया है। डीजल चालित पंपों की जगह बिजली से चलने वाले पंप और स्थायी पंपिंग स्टेशनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है। यात्रा में कटौती के लिए वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। बागवानी कार्यों में जैविक खाद के उपयोग और हरित अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।::: वर्जन :::प्रधानमंत्री की अपील केवल ईंधन की खपत कम करने तक सीमित नहीं है, यह व्यवस्था में अनुशासन और जिम्मेदारी लाने का आह्वान है। पीडब्ल्यूडी के साथ दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग में भी इन निर्देशों को पूरी भावना के साथ लागू कर रहे हैं। वाहनों का उपयोग कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से लेकर अधिकारियों को साथ मिलकर यात्रा करने और वर्चुअल बैठकें आयोजित करने तक हर कदम का उद्देश्य शासन को अधिक कुशल और जमीन से जुड़ा बनाना है। हमने निर्णय लिया है कि अग्रिम आदेशों तक कोई भी अधिकारी विदेश यात्रा नहीं करेगा, चाहे वह आधिकारिक हो या व्यक्तिगत।-प्रवेश साहिब सिंह, मंत्री, पीडब्ल्यूडी, जल व सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग------सरकारी गाड़ी छोड़ मंत्रियों ने बस और मेट्रो में किया सफर-कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने परिवहन के लिए मेट्रो को अपनाया-परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह बस में सफर करके दिल्ली सचिवालय पहुंचेनई दिल्ली, प्रसं। प्रधानमंत्री के सार्वजनिक परिवहन अपनाने के आह्वान पर दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने अमल शुरू कर दिया। बुधवार को कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने मेट्रो का उपयोग किया। वहीं परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह विकासपुरी से दिल्ली सचिवालय तक डीटीसी बस से यात्रा करके पहुंचे। यात्रा के दौरान दोनों मंत्रियों ने यात्रियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और सार्वजनिक परिवहन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया।कपिल मिश्रा ने कहा कि वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा संरक्षण करना सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपना काफिला आधे से कम कर दिया है। मंत्री भी सार्वजनिक परिवहन अपना रहे हैं। जरूरत पड़ने पर केवल एक सरकारी वाहन का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने दिल्लीवासियों से आग्रह किया कि वे निजी वाहनों की बजाय बस, मेट्रो अपनाएं। नजदीकी स्थानों पर पैदल जाएं या साइकिल का उपयोग करें।डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन देशहित में ईंधन बचाना दायित्व है। दिल्ली कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि सभी मंत्री नियमित रूप से बस और मेट्रो में यात्रा करेंगे, ताकि आम यात्रियों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझकर उनका समय पर समाधान किया जा सके। यात्रा के दौरान उन्हें कुछ यात्रियों ने बस स्टाॅप पर बस न रुकने की समस्या बताई। इस पर मंत्री ने उनको बताया कि इस बाबत पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं।------दिल्ली सरकार ने घटाया सरकारी वाहनों का उपयोग: रेखा गुप्तानई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री के पेट्रोल-डीजल बचत करने के आह्वान पर विभागीय कामकाज के लिए वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में सरकार के सभी कैबिनेट सहयोगी, भाजपा के सभी विधायक, जनप्रतिनिधि, दिल्ली सरकार के सभी विभागों के अधिकारियों ने जरूरत अनुरूप न्यूनतम वाहनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। वे कारपूल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से भी ईंधन बचाने के लिए निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के साथ-साथ कारपूलिंग की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईंधन बचाना केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसे जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी दिल्ली में मेट्रो व सार्वजनिक बसों का पर्याप्त बेड़ा है। इनकी पहुंच एनसीआर के शहरों तक भी है। मेट्रो सेवा आज दिल्ली-एनसीआर की जीवनरेखा बन चुकी है। इसका नेटवर्क 416 किलोमीटर पहुंच चुका है। प्रतिदिन 4500 से अधिक फेरे लगते हैं। इसमें प्रतिदिन दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और बहादुरगढ़ सहित दूसरे क्षेत्रों के 65 लाख से अधिक यात्रियों को सुविधा प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। डीटीसी के बेडे की 6300 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें 4538 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इस वर्ष अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 7500 करने का लक्ष्य है।वर्ष 2028 तक 14 हजार इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है।-------

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