महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को लंबे समय तक चुकानी पड़ेगी कीमत- मोदी
महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को लंबे समय तक चुकानी पड़ेगी कीमत- मोदी----------------------------प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक के लिए सभी दलों से की सहयोग की अपील-किसी राज्य के साथ न भेदभाव...

महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को लंबे समय तक चुकानी पड़ेगी कीमत- मोदी--------------------------- -प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक के लिए सभी दलों से की सहयोग की अपील-किसी राज्य के साथ न भेदभाव होना न अन्याय , गारंटी भी और वादा भी-राजनीति की तराजू पर न तौले, सभी को मिलेगा श्रेय-----------------नईदिल्ली। विशेष संवाददाताप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महिला आरक्षण के लिए लोकसभा में लाए गए विधेयकों के लिए सभी से सहयोग की पुरजोर अपील की है। प्रधानमंत्री ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए साफ किया कि किसी राज्य के साथ व भेदभाव होगा न अन्याय, यह उनकी गांरंटी भी है और वादा भी।
साथ ही प्रधानमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में आगाह भी किया कि जो भी इसका विरोध करेंगे,उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और इसका श्रेय वह विपक्षी दलों को भी देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि लगभद तीन दशक पहले जब देश में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हुई है और जब-जब चुनाव आया है, जिस दल ने महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सबने (2023 में) सहमति से इसे (महिला आरक्षण विधेयक) पारित किया था। किसी का राजनीतिक फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान नहीं हुआ।प्रधानमंत्री ने सभी से सहयोग की अपील के साथ आगाह भी किया कि अगर हम सब साथ में रहेंगे तो इतिहास गवाह है कि यह किसी के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा, देश के लोकतंत्र और सामूहिक निर्णय के पक्ष में जाएगा। जिन्हें इसमें राजनीति की बू आ रही है। वे खुद के 30 साल के परिणामों को देख लें। उनका इसमें ही फायदा है। नुकसान से बच जाएंगे। राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं। जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आज देश के हर क्षेत्र में देश की बेटियों का इतना बड़ा सामर्थ्य देखने को मिल रहा है। हम उन्हें यहां आने से रोकने में इतनी ताकत क्यों लगा रहे हैं। इसे राजनीतिक तराजू से मत तौलिए। यह राष्ट्रहित का निर्णय है। आज पूरा देश, विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय को तो देखेगी ही, निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट को देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।मोदी ने महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए विधेयक एक साथ लाने पर और कुछ राज्यों के साथ भेदभाव की विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि संविधान ने हमें यहां बैठकर देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। न टुकड़ों में सोच सकते हैं, न टुकड़ों में निर्णय ले सकते हैं। निराधार बात है, इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए बवंडर खड़ा किया जा रहा है। मोदी ने साफ किया कि दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्विम हो, छोटे राज्य हों, बड़े राज्य हों, निर्णय प्रकिया किसी के साथ भेदभाव और अन्याय नहीं करेगी। अतीत में जो सरकारें रहीं, जिनके कालखंड में परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए तो वह गारंटी देता हैं, वादा शब्द चाहें ते इसका इस्तेमाल करता हूं। तमिल में केोई अच्छा शब्द हो तो उसका इस्तेमाल करते हैं। नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की कोई जरूरत नहीं है।मोदी ने कहा कि हम सभी को इस अहंकार में नहीं रहना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उसका अधिकार है। उन्होंने कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि समय-समय पर सभी ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का समर्थन तो किया लेकिन किसी न किसी बहाने से इसे रोकने का प्रयास करते रहे। तरह-तरह की बहानेबाजी और चीजों को उलझाना अब नहीं चलेगा। यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि मुझे इसका राजनीतिक लाभ होगा। लेकिन साथ चलेंगे तो किसी को इसका लाभ नहीं होगा। हमें इसका श्रेय नहीं चाहिए। जैसे ही यह पारित हो जाए वह कल विज्ञापन देकर सबका धन्यवाद देकर, सबकी तस्वीर छपवाने को तैयार हैं। सामने से श्रेय का ब्लैंक चैक भी दे रहे हैं।मोदी ने कहा कि पहले ही देरी कर चुके हैं। कारण कुछ भी हों, जिम्मेदार कोई भी हो। कांग्रेस की सरकार के पंचायतों में आरक्षण दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ऐसी चर्चा होती थी कि पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, क्योंकि उसमें उन्हें खुद का पद जाने का डर नहीं लगता। आज लाखों पंचायत प्रतिनिधि महिलाएं आंदोलित हैं। वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो। और निर्णय प्रक्रिया विधानसभाओं और संसद में होती हैं। मोदी ने महिला आरक्षण में ओबीसी कोटे की समाजवादी पार्टी के सदस्यों की मांग पर कहा कि वह अति पिछड़े समाज से आते हैं, लेकिन उनका दायित्व समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है।उन्होंने कहा कि 2023 में जब विधेयक पारित किया गया था तो सभी कह रहे थे कि इसे जल्दी लागू करो। 2024 में यह संभव नहीं था। इतने कम समय में नहीं हो पाता। अगर हम 2029 (के लोकसभा चुनाव) में इसे लागू कर सकते हैं, तब भी नहीं करेंगे तो महिलाओं में विश्वास नहीं बना पाएंगे कि सच में प्रयास कर सकते हैं। उनका आग्रह है कि यह अवसर है कि पुरानी जो भी मुश्किलें रहीं, उनसे बाहर निकलें। हिम्मत से आगे बढ़ें। और नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें तथा इस विधेयक को सर्व सम्मति से इसे पारित करें।------------------------
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