अखिलेश यादव मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं; लोकसभा में ऐसा क्यों बोले पीएम मोदी
जब पीएम मोदी महिला आरक्षण पर बोल रहे थे तो सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कुछ बोलना शुरू किया। इस पर पीएम ने जवाब दिया कि मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। अखिलेश मेरे मित्र हैं तो कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं।

लोकसभा में महिला आरक्षण पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विपक्षी दलों से इसका समर्थन करने के लिए कहा। पीएम मोदी ने कहा कि जो विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। पीएम के संबोधन के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जब उन्होंने अखिलेश यादव को अपना मित्र बताते हुए कहा कि वे कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं। उन्होंने कहा कि राजनैतिक समझदारी इसी में है कि हम ग्रासरूट लेवल पर महिलाओं की लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको कंसीडर करें।
पीएम मोदी ने कहा, ‘’मुलायम सिंह थे, तब से एक विषय चला रहे। आप देश की बहनों पर भरोसा करो, एक बार 33 फीसदी बहनों को आने दो, आगे के निर्णय करेंगे, लेकिन एक बार आने तो दो।'' इस पर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कुछ बोलना शुरू किया, जिससे पीएम मोदी को अपना भाषण रोकना पड़ा। इस पर पीएम मोदी ने जवाब दिया कि मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। अखिलेश जी मेरे मित्र हैं तो मदद कर देते हैं। इस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और दोनों हाथ जोड़ लिए। पीएम मोदी ने आगे कहा कि यह बात सही है कि मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सभी लोगों को साथ लेकर चलने का है। संविधान ने भी मुझे यही रास्ता दिखाया है और मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है। यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज का दायित्व देश ने दिया।
'30 साल पहले ही इसे हो जाना चाहिए था लागू'
महिला आरक्षण पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिंदगी में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय समाज की मन: स्थिति और नेतृत्व की क्षमता उसे कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है और मजबूत धरोहर तैयार करती है। भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। जरूरत तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब यह विचार सामने आया, तब उसे लागू कर दिया जाता। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की विकासयात्रा रही है और उस विकास यात्रा में नया आयाम जोड़ने का सुअवसर सभी साथियों को मिला है। शुरुआत में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है।
'नीति निर्धारण का हिस्सा बनें, यह समय की मांग'
पीएम मोदी ने कहा देश की 50 फीसदी जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बनें, यह समय की मांग है। पहले ही देर हो चुकी है, कारण कोई भी हो लेकिन यह स्वीकार करना होगा कि जब अकेले मिलते हैं तो हां यार, जब इसकी प्रक्रिया मिली तो सभी दल से मिले तो किसी ने भी विरोध नहीं किया, लेकिन बाद में राजनैतिक दिशा पकड़ी जा रही। जो राजनैतिक दिशा में ही सोचते हैं, उन्हें मित्र के रूप में एडवाइज करता हूं। हमारे देश में जबसे महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई है और जब जब चुनाव आया, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिसने जिसने विरोध किया, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से भी बुरा किया है, लेकिन 24 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि सबने 24 में सहमति से इससे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी का फायदा नहीं हुआ तो किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। 2024 में सब साथ में थे, आज भी मैं कहता हूं कि अगर सब साथ में जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि किसी एक के राजनैतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा। जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही, वे खुद के 30 सालों के परिणाम को देख लें। इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।




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