शिवकुमार ने कांग्रेस के संकटमोचक से मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया
डी.के. शिवकुमार का चार दशकों का राजनीतिक सफर कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है। 1985 में विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद, उन्होंने आठ बार जीत हासिल की। 2023 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिलाने के बाद, वह अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी के बावजूद वह कांग्रेस के प्रति वफादार रहे।

बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक के डोड्डा अलाहल्ली गांव की धूलभरी गलियों से लेकर कर्नाटक के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक डी.के. शिवकुमार का चार दशकों का सफर उथल-पुथल, जीत और कांग्रेस के प्रति अटूट वफादारी से भरा रहा है। कॉलेज के दिनों से राजनीति में सक्रिय रहे शिवकुमार ने 1985 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें जीत 1989 में हासिल हो सकी। इस पहली जीत के बाद उन्होंने लगातार आठ बार विधायकी जीती है। यही वजह है कि उन्हें कनकपुरा बांडे (कनकपुरा की चट्टान) कहा जाता है। विधानसभा में कनकपुरा का प्रतिनिधित्व करने के साथ शिवकुमार ने खुद को प्रदेश में बड़े वोक्कालिगा नेता के तौर पर स्थापित किया, जो राज्य के प्रमुख कृषिप्रधान समुदायों में एक है। 2017 में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को तब अपने राजनीतिक कौशल का परिचय दिया, जब राज्यसभा चुनाव से पूर्व पार्टी ने उन्हें गुजरात के 42 कांग्रेस विधायकों की जिम्मेदारी सौंपी। उनकी पुख्ता व्यवस्था का नतीजा रहा कि कांग्रेस प्रत्याशी अहमद पटेल ने वह चुनाव जीता।
2020 में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने
2020 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इससे पेर्व 2018 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, और 224 सदस्यों वाले सदन में 134 सीटें जीतीं। इसके बाद वह सिद्धरमैया सरकार में उपमुख्यमंत्री के साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी बने रहे। अब तीन जून को वह प्रदेश के मुखिया की कुर्सी संभालने वाले हैं।
50 दिन तक तिहाड़ जेल में रहे
शिवकुमार के लिए 2019 का साल कुछ मुश्किलों भरा रहा, जब आयकर विभाग ने उनकी संपत्तियों पर छापेमारी की। इसके बाद ईडी ने भी लगातार कई अभियान चलाए। तीन सितंबर 2019 को शिवकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद वह 50 दिन तक तिहाड़ जेल में रहे। उस दौरान यह माना जा रहा था कि शायद वह कांग्रेस छोड़ देंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और वह कांग्रेस के लिए वफादार बने रहे।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन