झारखंड के ध्यानार्थ::आदिवासियों के लिए जंगल, पहाड़ और जल स्रोत आस्था के केंद्र: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनजाति सांस्कृतिक समागम में कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समुदायों में आस्था और जंगलों की रक्षा का संदेश फैलाया था। उन्होंने आदिवासी जीवनशैली को बेहतरीन मॉडल बताते हुए धर्म परिवर्तन के लिए लालच या जबरदस्ती का विरोध किया।

दिल्ली में जनजाति सास्कृतिक समागम में बोले शाह बिरसा मुंडा ने आदिवासी समुदायों के बीच आस्था,जंगलों की रक्षा का संदेश फैलाया था
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि आदिवासी महानायक बिरसा मुंडा ने पूरे देश में आदिवासी समुदायों के बीच आस्था, जंगलों और पहचान की रक्षा का संदेश फैलाया था। उनके 'उलगुलान' आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और जल स्रोत आदिवासी समुदायों की आस्था, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र हैं।
देशभर में फैलाया आंदोलन
दिल्ली में 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि यह वर्ष बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का वर्ष है। उन्होंने उस दौर में संचार सुविधाओं की कमी के बावजूद आदिवासी समुदायों को एकजुट करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उलगुलान आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी। उस समय, किसी भी संचार सुविधा के अभाव के बावजूद भगवान बिरसा मुंडा ने झारखंड से गुजरात तक और पूरे भारत में आदिवासी समुदायों के बीच यह संदेश फैलाया कि यह हमारा देश है, हमारा धर्म ही सच्चा धर्म है, और कोई भी हमारे जंगलों पर कब्जा नहीं कर सकता।
आदिवासियों की जीवनशैली बेहतरीन मॉडल
अमित शाह ने आदिवासी जीवन शैली को सबसे बेहतरीन मॉडल बताया और कहा कि आदिवासी समुदायों ने बिना किसी लिखित नियम के अनेकता में एकता और एकता में अनेकता के सिद्धांत को बनाए रखा है।
शाह ने कहा, हमारे आदिवासी भाइयों के लिए ये जल स्रोत, जंगल और पहाड़ आस्था के केंद्र हैं, आजीविका का साधन हैं। उनकी पहचान व संस्कृति की रक्षा के लिए अभेद्य किला हैं। आज, यदि कोई सबसे बेहतरीन सतत मॉडल मौजूद है, तो वह हमारे आदिवासी समुदायों द्वारा बनाया गया मॉडल ही है। हम इसकी रक्षा के लिए आगे आए हैं।
जबरदस्ती कोई धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता
गृह मंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति के अपनी आस्था का सम्मान के साथ पालन करने के संवैधानिक अधिकार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन लालच, प्रलोभन या जबरदस्ती नहीं किया जाना चाहिए। हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में आत्म-सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। कोई भी व्यक्ति लालच, प्रलोभन या जबरदस्ती से किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता। और मेरा मानना है कि अगर आज यहां इकट्ठा हुआ जनजातीय समुदाय (वनवासी कुंभ) यह संकल्प ले कि हमारा धर्म चाहे जो भी हो, हम जनजातीय समुदायों की विभिन्न मान्यताओं के अनुसार ही अपना जीवन जीते रहेंगे, तो यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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