दिल्ली की यह कॉलोनी बनी पूरी तरह से मैकेनाइज्ड पहली 'अनुपम कॉलोनी', लोगों को होगा यह फायदा
NDMC प्रमुख ने इसे एक पायलट प्रोजेक्ट बताया और कहा कि काका नगर के प्रदर्शन के आधार पर इस मॉडल को NDMC की अन्य कॉलोनियों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने इस बदलाव में RWA और सफाई कर्मचारियों से मिले सहयोग की सराहना की।

दिल्ली में धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने व हवा को ज्यादा स्वच्छ बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाते हुए NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) ने बुधवार को काका नगर को छठी 'अनुपम कॉलोनी' घोषित कर दिया, जिसके बाद यह राष्ट्रीय राजधानी का पहला ऐसा रिहायशी इलाका बन गया है, जहां सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से मशीनीकृत और धूल-मुक्त कर दी गई है। सफाई के इस नए सिस्टम के तहत कॉलोनी में सफाई के काम के लिए 5 पुश-बैक मैकेनिकल स्वीपर और एक गॉबलर मशीन तैनात की गई हैं।
इस बारे में जानकारी देते हुए NDMC के अध्यक्ष केशव चंद्र ने बताया कि यह कदम स्वच्छ हवा और टिकाऊ शहरी स्वच्छता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। साथ ही उन्होंने कहा कि अब काका नगर में पारंपरिक झाड़ू के बजाय आधुनिक मशीनों से सफाई की जाएगी। उधर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस मशीनीकृत सफाई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकना और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। अधिकारियों ने बताया कि काका नगर के शामिल होने के साथ ही, यह कॉलोनी NDMC के अंतर्गत पहले से ही अनुपम कॉलोनी घोषित हो चुकी पांच अन्य रिहायशी इलाकों में शामिल हो गई है।
एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई शुरुआत
NDMC प्रमुख केशव ने इसे एक पायलट प्रोजेक्ट बताया और कहा कि काका नगर के प्रदर्शन के आधार पर इस मॉडल को NDMC की अन्य कॉलोनियों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने इस बदलाव में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और सफाई कर्मचारियों से मिले सहयोग की सराहना भी की।
इन इलाकों को पहले मिल चुका है 'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा
काका नगर से पहले NDMC ने भारती नगर, बापू धाम, न्यू मोती बाग, आराधना कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और डी-1, डी-2 व सत्य सदन ऑफिसर्स फ्लैट्स को 'अनुपम कॉलोनी' का दर्जा दिया था। हालांकि, इनमें से काका नगर पूरी तरह मशीनी सफाई अपनाने वाली पहली कॉलोनी है।
उधर NDMC द्वारा अपनाए गए कचरा प्रबंधन के अन्य उपायों की जानकारी देते हुए विभाग के सलाहकार (ठोस कचरा प्रबंधन) राजीव कुमार जैन ने कहा कि बागवानी और गीले कचरे को प्रोसेस करने के लिए कॉलोनी में 12 वायर-मेश कम्पोस्टिंग यूनिट लगाई गई हैं। साथ ही यहां बनने वाली खाद का इस्तेमाल पार्कों में किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि यहां बनने वाली खाद को 'गीला कूड़ा लाओ, खाद ले जाओ' पहल के तहत स्थानीय निवासियों को बांटा जा रहा है।
इसके अलावा विभिन्न सामाजिक पहलों में आम नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए NDMC ने इलाके में एक RRR (रिड्यूस, रियूज, रीसायकल) केंद्र और एक 'नेकी की दीवार' भी बनाई है, जहां पर लोग अपनी अच्छी लेकिन गैरजरूरी चीजों व कपड़ों का दान कर सकते हैं और रीसायकल करने योग्य चीजों को अलग कर सकते हैं।




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