NCR के वकीलों की दिल्ली की अदालतों में चैंबर की मांग; हाईकोर्ट ने कमेटी को सौंपा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट ने पोर्टफोलियो कमेटी को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद जैसे एनसीआर शहरों में रहने वाले वकीलों को भी दिल्ली की जिला अदालतों में चैंबर मिल सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में अपनी पोर्टफोलियो कमेटी को यह विचार करने का निर्देश दिया है कि क्या दिल्ली के बाहर एनसीआर जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रहने वाले वकीलों को भी दिल्ली की जिला अदालतों में चैंबर मिल सकते हैं। एक वकील ने अदालत में याचिका दायर कर उन नियमों को चुनौती दी थी जो केवल दिल्ली में रहने वाले वकीलों को ही चैंबर आवंटन का पात्र मानते हैं। याचिकाकर्ता की दलील थी कि कई वकील दिल्ली के बाहरी इलाकों में रहते हैं जो अदालत के काफी करीब हैं इसलिए उन्हें इस सुविधा से बाहर रखना भेदभावपूर्ण है।
क्या अलॉट किए जा सकते हैं चैंबर?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी पोर्टफोलियो कमेटी से यह तय करने को कहा कि क्या दिल्ली के नजदीक में रहने वाले वकीलों को दिल्ली जिला अदालतों में वकीलों के चैंबर अलॉट किए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव एवं न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने एक वकील की याचिका का निपटारा किया है।
पात्रता की शर्त को चुनौती
इस याचिका में शाहदरा/कड़कड़डूमा, द्वारका व रोहिणी जिला अदालतों में वकीलों के चैंबर आवंटित करने के नियमों के तहत रहने की जगह के आधार पर पात्रता की शर्त को चुनौती दी गई।
एनसीआर के वकीलों को बाहर रखना भेदभावपूर्ण
पेशे से वकील याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पात्रता सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहने वाले वकीलों तक सीमित करना व गाजिबयाद, फरीदाबाद अथवा नजदीक के शहरों (एनसीआर) में रहने वालों को बाहर रखना, मनमाना, बराबरी व भेदभाव न करने के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।
नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम वाले भी करते हैं दिल्ली में प्रैक्टिस
यह तर्क दिया गया कि दिल्ली की अदालतों में नियमित प्रैक्टिस करने वाले कई वकील नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे एनसीआर इलाकों में रहते हैं, जो अक्सर दिल्ली के कई हिस्सों की तुलना में अदालत परिसर के ज्यादा पास होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान, दिल्ली सरकार के स्थायी वकील गोपाल झा बनाम सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (2019) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जहां उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि बदले हुए हालात व दिल्ली के आसपास शहरी फैलाव को देखते हुए वकीलों के चैंबर के आवंटन के लिए रहने की जगह के आधार पर पात्रता की शर्तों पर फिर से विचार करने का समय आ गया है।
पोर्टफोलियो कमेटियां उचित करेंगी विचार
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे पॉलिसी मामलों पर आखिरी फैसला सही आवंटन कमेटियों पर छोड़ दिया था। इस मिसाल को ध्यान में रखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे पर संबंधित जिला अदालतों से जुड़ी उच्च न्यायालय की पोर्टफोलियो कमेटियों द्वारा ज्यादा सही तरीके से विचार किया जाएगा।




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