रैपिडो, ओला से ड्रग्स डिलीवरी, 1 ग्राम की कीमत 5500 रुपये तक; NCR में छात्रों को ऐसे बना रहे नशेड़ी
NCR Drugs Racket busted: इस नेटवर्क का कथित सरगना गौरव खन्ना अब गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी डार्क वेब, सोशल मीडिया और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर छात्रों तक नशे की खेप पहुंचा रहा था।

दिल्ली-एनसीआर के कॉलेज छात्रों को विदेशी ड्रग्स सप्लाई करने वाले एक हाईटेक नेटवर्क का उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। इस नेटवर्क का कथित सरगना गौरव खन्ना अब गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी डार्क वेब, सोशल मीडिया और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर छात्रों तक नशे की खेप पहुंचा रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह गैंग रैपिडो, ओला, ऊबर और पोर्टर के जरिए ड्रग्स डिलीवर करता था, ताकि किसी को शक न हो। गैंग के पास से OG, बाबा कुश, चरस, LSD जैसे महंगे विदेशी नशीले पदार्थों के कारोबार के सबूत मिले हैं, जिनकी कीमत हजारों रुपये प्रति ग्राम तक बताई गई है।
गैंग का सरगना गिरफ्तार, उगले कई राज
एसटीएफ के मुताबिक, गौरव खन्ना को 24 मई को ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके से गिरफ्तार किया गया। वह लंबे समय से फरार चल रहा था। इससे पहले इसी गैंग के सदस्य करन राजीव को 5 मई को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से चरस, OG गांजा, अल्फा पाउडर, THC ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक तराजू, कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और डेबिट-क्रेडिट कार्ड बरामद किए गए थे। उसी मामले में गौरव खन्ना की तलाश की जा रही थी।
कॉलेज के छात्रों को बना रहे नशेड़ी
एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कॉलेजों और हॉस्टलों में पढ़ने वाले छात्रों को टारगेट करता था। इसके लिए वह WhatsApp और Telegram पर कम्युनिटी ग्रुप और ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाता था। इन ग्रुपों में विदेशी ड्रग्स और “प्रीमियम क्वालिटी” गांजा-चरस का प्रचार किया जाता था। आरोपी ऑनलाइन ऑर्डर लेते थे और फिर अलग-अलग डिलीवरी ऐप्स के जरिए छात्रों तक माल पहुंचाते थे।
डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी की मदद से तस्करी
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ड्रग्स की पैकिंग इस तरह करते थे कि बाहर से देखने पर वह पेन ड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरी या कंप्यूटर उपकरण जैसा लगे। इससे डिलीवरी के दौरान किसी को शक नहीं होता था। आरोपी फर्जी पते पर कुरियर के जरिए पार्सल मंगाते थे और फिर कथित मिलीभगत से उन्हें उठा लेते थे। एसटीएफ का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स माफियाओं से संपर्क डार्क वेब के जरिए किया जाता था और पेमेंट क्रिप्टोकरेंसी में होती थी।
1400-5500 रुपये प्रति ग्राम में बेचते
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गैंग विदेशी ड्रग्स को बेहद ऊंची कीमत पर बेचता था। एसटीएफ के मुताबिक OG गांजा करीब 1400 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा जाता था। वहीं “बाबा कुश” नाम से बिकने वाला THC ऑयल 5500 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच जाता था। इसके अलावा हैश यानी चरस की कीमत 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है, जबकि LSD करीब 4400 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और पढ़ाई करने वाले युवाओं को तेजी से नशे की तरफ धकेल रहा था।
थाइलैंड से भी मंगाता था ड्रग्स
गौरव खन्ना ने पूछताछ में बताया कि वह वर्ष 2019 से यह नेटवर्क चला रहा था। उसने थाईलैंड से OG गांजा मंगाने और हिमाचल से चरस सप्लाई कराने की बात भी कबूल की है। एसटीएफ को यह भी जानकारी मिली है कि गैंग ने अलग-अलग बैंकों में करीब 17 खाते खोल रखे थे और दो प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के बैंक खातों का इस्तेमाल भी पैसों के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। फिलहाल एसटीएफ पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और कितने कॉलेज छात्र इसकी चपेट में आ चुके हैं।




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