409 रुपये था दिल्ली जिमखाना क्लब का किराया, अब 47 करोड़ का बिल; 10 हजार गुना बढ़ोतरी पर बवाल
मामला क्लब की जमीन, लीज शर्तों और बढ़ाए गए किराए से जुड़ा है। अब केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक लुटियंस दिल्ली स्थित अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ क्लब के एक सदस्य ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई 26 मई को होगी।

नई दिल्ली के दिल्ली जिमखाना क्लब और केंद्र सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला क्लब की जमीन, लीज शर्तों और बढ़ाए गए किराए से जुड़ा है। अब केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक लुटियंस दिल्ली स्थित अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ क्लब के एक सदस्य ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई 26 मई को होगी।
अब तक 15 रुपये प्रति एकड़ था किराया
यह क्लब सफदरजंग रोड पर स्थित है और 1927 से इसी परिसर में चलाया जा रहा है। क्लब को अंग्रेजों के दौर में स्थायी लीज पर जमीन दी गई थी। उस समय तय हुए समझौते के मुताबिक क्लब को प्रति एकड़ 15 रुपये सालाना किराया देना था। इस हिसाब से पूरी जमीन का कुल सालाना किराया सिर्फ 409.50 रुपये बनता था।
किराए में हुई 10000 गुना बढ़ोतरी
लेकिन अब केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी है। पहले 2023 में किराया बढ़ाकर करीब 4.10 करोड़ रुपये सालाना किया गया। इसके बाद अप्रैल 2026 में इसे बढ़ाकर 47.59 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया। क्लब ने इस बढ़ोतरी को “मूल किराए से 10 हजार गुना ज्यादा” बताया है।
क्लब का कहना है कि सरकार ने सालाना किराया 409.50 रुपये से बढ़ाकर 4.09 करोड़ रुपये कर दिया, जो मूल किराए से करीब 10 हजार गुना ज्यादा है। बाद में ब्याज और अन्य शुल्क जोड़कर कुल बकाया 47.59 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
क्लब बोला, 90 साल में पहली बार बढ़ा किराया
क्लब ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि 90 साल के इतिहास में पहली बार सरकार ने इस तरह से किराया बढ़ाया है। क्लब का दावा है कि सरकार ने 2018 से पिछली तारीखों से नया किराया लागू किया, जो नियमों के खिलाफ है। क्लब ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान करना उसके लिए लगभग असंभव है।
सरकार बोली, क्लब ने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया
दूसरी तरफ सरकार का आरोप है कि क्लब ने लीज की कई शर्तों का उल्लंघन किया है। मंत्रालय के मुताबिक परिसर में अनधिकृत निर्माण, गलत इस्तेमाल और अतिक्रमण जैसी कई गड़बड़ियां मिली हैं। सरकार ने यह भी कहा कि क्लब ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को ऑफिस स्पेस सबलेट किया था। मंत्रालय ने क्लब को कई नोटिस भेजे और कथित उल्लंघनों को सुधारने को कहा।
5 जून तक परिसर खाली करने का दिया आदेश
सितंबर 2025 में मंत्रालय ने क्लब को चेतावनी दी थी कि अगर उल्लंघन नहीं सुधारे गए, तो सरकार “री-एंट्री पावर” का इस्तेमाल कर सकती है। बाद में सरकार ने बकाया किराया, ब्याज और अन्य शुल्क जोड़ते हुए कुल मांग 47.59 करोड़ रुपये तक पहुंचा दी। अब सरकार ने क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह जमीन रक्षा और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के लिए चाहिए।
इस बीच क्लब की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। क्लब का कहना है कि विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशें भी जारी हैं। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल विवाद पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
साल 1913 में हुई थी इस क्लब की स्थापना
आपको बता दें कि तीन जुलाई 1913 को 'इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में स्थापित इस संस्था की शुरुआत औपनिवेशिक प्रशासनिक अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के लिए की गई थी। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद इसके नाम से 'इम्पीरियल' शब्द हटा दिया गया था, जबकि मौजूदा इमारतों का निर्माण 1930 के दशक में हुआ था।




साइन इन