दिल्ली की 130 सरफेस पार्किंग का होगा कायाकल्प, ओवरचार्जिंग से भी मिलेगी राहत; MCD ने बनाया यह मास्टरप्लान
खुली पार्किंग की वजह से परेशानी झेलने वाले एक यात्री ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि, 'एक बार ऐसा हुआ था कि जब मैंने अपनी कार रामलीला मैदान में पार्क की, तो मेरे जूते बहुत अधिक गंदे हो गए थे। उस दिन मेरी एक जरूरी मीटिंग थी और ऑफिस जाने से पहले मुझे मोची ढूंढने में लगभग डेढ़ घंटा लग गया था।'

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए और लोगों की सुविधा बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार किया है। जिसके तहत निगम अपने अंतर्गत आने वाले सभी 12 जोनों में बनी लगभग 130 सरफेस समतल पार्किंग (खुले मैदान वाली पार्किंग) स्थलों का कायाकल्प करने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बारिश के दिनों में ऐसी कच्ची जमीन वाली पार्किंग में होने वाले कीचड़ व उसके सूखने के बाद उससे उड़ने वाली धूल को रोकना है। क्योंकि यही धूल हवा में प्रदूषण का स्तर और खराब कर देती है।
अधिकारियों के अनुसार इस काम के लिए जिन पार्किंग साइट्स को चुना गया है, उनमें रामलीला मैदान और कीर्ति नगर टिम्बर मार्केट जैसे प्रमुख पार्किंग लॉट शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि पार्किंग स्थलों का कायाकल्प करने की इस योजना की जिम्मेदारी निगम के इंजीनियरिंग विभाग को दी गई है। इसके तहत पार्किंग स्थलों पर मुख्य रूप से इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक लगाए जाएंगे, ताकि धूल को उड़ने से रोका जा सके।
गर्मी में उड़ती है धूल, बारिश में हो जाता है कीचड़
आगे उन्होंने बताया कि मॉनसून के दौरान ये खुले प्लॉट वाली पार्किंग अक्सर कीचड़ वाली हो जाती हैं और इनमें बहुत ज्यादा धूल जमा हो जाती है, जो गाड़ियों पर जम जाती है और इस्तेमाल करने वालों के लिए परेशानी खड़ी करती है। वहीं बारिश के बाद यही कीचड़ धूल बनकर लोगों को सताने लगता है।
कीचड़ की वजह से परेशानी झेलने वाले शख्स ने सुनाया किस्सा
खुली पार्किंग की वजह से परेशानी झेलने वाले एक शख्स ने पीटीआई को किस्सा सुनाते हुए बताया कि, 'एक बार ऐसा हुआ था कि जब मैंने अपनी कार रामलीला मैदान में पार्क की, तो मेरे जूते बहुत अधिक गंदे हो गए थे। उस दिन मेरी एक जरूरी मीटिंग थी और ऑफिस जाने से पहले मुझे मोची ढूंढने में लगभग डेढ़ घंटा लग गया था।'
पार्किंग कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना हुआ अनिवार्य
इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के अलावा, MCD ने पार्किंग संचालन के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए भी नए निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान पार्किंग शुल्क वसूलने वाले ठेकेदारों और कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। दरअसल अधिकारियों को कई पार्किंग साइट्स पर तय राशि से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद पार्किंग शुल्क वसूलने वाले सभी ठेकेदारों के लिए वर्दी पहनने का नियम बना दिया गया।
इस वजह से ज्यादा पार्किंग शुल्क वसूलते हैं कर्मचारी
पार्किंग कर्मचारियों द्वारा अधिक राशि वसूलने की वजह बताते हुए एक अधिकारी ने बताया कि 'टेंडर प्रक्रिया के दौरान पार्किंग के ठेके हासिल करने के लिए ठेकेदार अक्सर 11 से 12 लाख रुपए तक की ऊंची बोली लगा देते हैं। जिसके बाद उन्हें ठेका तो मिल जाता है, लेकिन इन साइट्स से आमतौर पर हर महीने लगभग 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी ही होती है। ठेके की कीमत और उससे होने वाली वास्तविक आय के इसी अंतर को पाटने के लिए, कुछ ठेकेदार अवैध वसूली शुरू कर देते हैं। जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
पार्किंग के लिए अलग-अलग एजेंसियां, कोई रेगुलेटरी नहीं
अधिकारी ने आगे कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC), रेलवे, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और निजी संस्थानों जैसी अलग-अलग एजेंसियों में पार्किंग के लिए कोई एक जैसा रेगुलेटरी सिस्टम न होने से, कीमतों में असमानता की समस्या और बढ़ गई है। अधिकारियों ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी, और तय शुल्क से ज्यादा रेट वाले बोर्ड लगाने या तय शुल्क से ज्यादा पैसे लेने वाले ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।




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