दिल्ली को मलबे से मुक्ति दिलाने MCD का एक्शन प्लान, इस इलाके में लगेगा नया प्रोसेसिंग प्लांट
अधिकारियों ने आगे बताया कि कचरा इकट्ठा करने और उसका निपटारा करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना हाल ही में राज्य सरकार को सौंपी गई थी, और केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद से मलबे को हटाने के अभियान भी तेज कर दिए गए हैं।

दिल्ली में मलबे के प्रबंधन और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम (MCD) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तेहखंड निर्माण और विध्वंस (C&D) वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट को जल्द से जल्द शुरू करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इस प्लांट के निर्माण के लिए दिसंबर 2026 की समय सीमा तय की गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्लांट के बनने से शहर में मलबे की समस्या से निपटने में आसानी होगी।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में वर्तमान में रोजाना लगभग 7,000 मीट्रिक टन C&D मलबा निकलता है,लेकिन फिलहाल केवल 5,000 मीट्रिक टन मलबे को ही प्रोसेस करने की क्षमता है। ऐसे में ओखला के पास बनने वाली यह नया प्लांट मौजूदा प्रोसेसिंग क्षमता में हर दिन 1,000 मीट्रिक टन की बढ़ोतरी कर देगा। अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में जो 2 हजार टन का मलबा प्रोसेस नहीं हो पा रहा है, कई बार इस कमी की वजह से राजधानी भर में जगह-जगह मलबा जमा हो जाता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
केंद्र सरकार से मिले निर्देश के बाद तेज हुआ काम
अधिकारियों ने आगे बताया कि कचरा इकट्ठा करने और उसका निपटारा करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना हाल ही में राज्य सरकार को सौंपी गई थी, और केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद से मलबे को हटाने के अभियान भी तेज कर दिए गए हैं।
12 दिन में ही हटा दिया 80 हजार मीट्रिक टन मलबा
एक अधिकारी ने कहा, '15 दिनों के अंदर एक लाख मीट्रिक टन मलबा हटाने का लक्ष्य रखा गया था। 12 दिनों में ही लगभग 80,000 मीट्रिक टन मलबा हटाया जा चुका है और उसे प्रोसेसिंग प्लांट में भेज दिया गया है।' उन्होंने बताया कि दिल्ली में अभी चार C&D (निर्माण और तोड़फोड़) कचरा प्लांट चालू हैं, इनमें बक्करवाला की क्षमता 1,000 MT, बुराड़ी की 2,000 MT, रानीखेड़ा की 1,000 MT और शास्त्री पार्क की 1,000 MT है।
मलबे को प्रोसेस कर बनाए जा रहे टाइल्स व स्लैब
अधिकारी ने बताया कि इन प्लांटों में इस C&D मलबे को प्रोसेस करके दोबारा इस्तेमाल करने लायक चीजों जैसे टाइल्स व स्लैब में बदला जाता है, और मलबे से बनी इन टाइल्स और स्लैब के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल इसमें निजी खरीदारों की हिस्सेदारी मांग का लगभग 67 प्रतिशत है, जबकि सरकारी एजेंसियां लगभग 14 प्रतिशत खरीदती हैं।
साल के अंत तक उत्पादन 12 लाख मीट्रिक टन पहुंचने की उम्मीद
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले साल अप्रैल से नवंबर के बीच, निजी बाजार में 4.5 लाख मीट्रिक टन प्रोसेस किया हुआ माल बेचा गया था, इसमें से 80 हजार मीट्रिक टन माल सरकारी एजेंसियों ने खरीदा था। वहीं 2026 के आखिर तक इसका कुल उत्पादन 12 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें से ज्यादातर हिस्सा निजी क्षेत्र द्वारा इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
अधिकारी ने बताया कि कचरे के निपटान को आसान बनाने और धूल को कम करने के लिए MCD सभी 250 वार्डों में खास डंपिंग साइटें तय करने की योजना बना रही है और विभागों को इस चल रहे अभियान में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं, और निवासी MCD 311 मोबाइल ऐप के जरिए मलबे की जानकारी दे सकते हैं ताकि उसे समय पर उठाया जा सके।




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