पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का बकाया 3700 करोड़ चुकाएगी दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार ने पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण लागत के भुगतान को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना दिल्ली को भारी वाहनों के दबाव से मुक्त करेगी और वायु प्रदूषण को कम करेगी। पिछले सरकार पर निशाना साधते हुए कहा गया कि उन्होंने जानबूझकर भुगतान में देरी की।

-वर्षों से लटका था पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का पैसा, 3,700 करोड़ रुपये के भुगतान को दी सरकार ने मंजूरीनई दिल्ली प्रमुख संवाददाता दिल्ली सरकार ने ‘पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे’ की भूमि अधिग्रहण लागत में दिल्ली की बकाया हिस्सेदारी के भुगतान प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इन पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का मुख्य उद्देश्य दिल्ली को भारी वाहनों के दबाव से मुक्त करना और शहर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर कभी गंभीरता नहीं दिखाई और राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्र सरकार को जानबूझकर भुगतान रोके रखा, जिससे दिल्ली के हितों को नुकसान पहुंचा।मुख्यमंत्री
ने बताया कि पिछले दिनों आयोजित कैबिनेट बैठक में लोक निर्माण विभाग के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत दिल्ली सरकार कुल बकाया राशि का भुगतान चरणबद्ध तरीके से करेगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट अनुमानों से 500 करोड़ रुपये की पहली किस्त केंद्र सरकार/भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जारी की जाएगी। बाकी बची 3203.33 करोड़ रुपये की राशि भविष्य के बजट प्रावधानों के आधार पर किस्तों में दी जाएगी।मुख्यमंत्री के अनुसार 2018 में शुरू हुए इन एक्सप्रेसवे ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के माध्यम से दिल्ली को एक सुरक्षा घेरा (यातायात के लिए) प्रदान किया है। इस भुगतान से अंतर-राज्यीय वित्तीय मुद्दों का समाधान होगा और भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए केंद्र के साथ समन्वय बेहतर होगा। इससे न केवल यात्रियों के समय की बचत हो रही है, बल्कि दिल्ली की हवा को साफ रखने में भी बड़ी मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य केंद्र के साथ मिलकर विकास की गति को तेज करना है।पिछली सरकार पर मुख्यमंत्री ने साधा निशानाइस भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार दिल्ली के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं थी। उसका एकमात्र एजेंडा केंद्र सरकार के साथ अनावश्यक विवाद पैदा करना और विकास कार्यों में अड़ंगे डालना था। उन्होंने कभी नहीं चाहा कि दिल्ली की यातायात व्यवस्था में सुधार हो इसीलिए वर्षों तक इस भुगतान को लटकाए रखा गया।दिल्ली के लिए विशेष हैं पेरिफेरल एक्सप्रेसवेपूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (डब्ल्यूपीई) ने मिलकर दिल्ली के चारों ओर ‘स्मार्ट रिंग रोड’ का निर्माण किया है। लगभग 135-135 किलोमीटर लंबे ये छह-लेन एक्सप्रेसवे उन लाखों भारी ट्रकों और कमर्शियल वाहनों को दिल्ली की सीमा के बाहर ही रोक देते हैं, जिन्हें केवल दिल्ली से होकर गुजरना होता है। इससे दिल्ली की सड़कों पर अनावश्यक दबाव कम हुआ है। दिल्ली में प्रवेश करने वाले डीजल वाहनों की संख्या घटने से प्रदूषण की संभावना भी कम हो जाती है। इसके अलावा जाम से मुक्ति और समय की बचत भी हो रही है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन