दिल्ली सरकार AI के जरिये प्रदूषण के सोर्स का पता लगाने को IIT-कानपुर की लेगी मदद, क्या है योजना
दिल्ली सरकार IIT कानपुर के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज कर प्रदूषण के सोर्स की बारीकी से पहचान और उनके असर का आकलन करने के लिए एक संभावित सहयोग पर विचार कर रही है।

दिल्ली सरकार IIT कानपुर के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज कर प्रदूषण के सोर्स की बारीकी से पहचान और उनके असर का आकलन करने के लिए एक संभावित सहयोग पर विचार कर रही है। रविवार को एक अधिकारिक बयान में बताया गया कि पर्यावरण विभाग सहयोग के लिए रोडमैप, संस्थागत तंत्र और चरणबद्ध कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस नई पहल के बारे में बताते हुए कहा, “हम एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं जहां फैसले सिर्फ प्रतिक्रियात्मक उपायों पर बल्कि रियल-टाइम डेटा, सोर्स की पहचान और मापने लायक नतीजों पर आधारित होंगे।”
प्रस्तावित सहयोग का क्या मकसद
प्रस्तावित सहयोग का मकसद दिल्ली के प्रदूषण के सोर्स को बारीकी से पहचानने, उनके असर का आकलन करने और सभी सेक्टर में टारगेटेड, समय पर हस्तक्षेप की क्षमता को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जोर ऐसे सिस्टम बनाने पर है जो लगातार निगरानी, विश्लेषण, पूर्वानुमान और कार्रवाई को गाइड कर सकें।
इस अप्रोच का एक मुख्य आधार डायनामिक सोर्स अपोर्शनमेंट है, जो अधिकारियों को धूल, ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री, बायोमास जलाने और क्षेत्रीय कारकों से होने वाले योगदान को साइंटिफिक तरीके से पहचानने में मदद करेगा।
प्रदूषण के सोर्स पर कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा
सिरसा ने कहा कि यह सबूत एजेंसियों को पूरी तरह से बैन लगाने और प्रतिक्रियात्मक उपायों का सहारा लेने के बजाय प्रदूषण के सोर्स पर कार्रवाई करने में सक्षम बनाएगा।
प्रस्तावित सहयोग मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन पर भी जोर देता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नगर निकाय, जिला प्रशासन, एन्फोर्समेंट एजेंसियां और टेक्निकल संस्थान साफ तौर पर तय भूमिकाओं और जवाबदेही के साथ एक शेयर्ड डेटा प्लैटफॉर्म पर काम करें।
सिरसा ने कहा, "जब हर एजेंसी एक ही वैज्ञानिक सबूत के आधार पर काम करती है, तो कार्रवाई तेजी से, सटीक और ज्यादा असरदार होती है। इसी तरह हम दिल्ली को आग बुझाने से लेकर असल रोकथाम की तरफ बदलने का लक्ष्य बना रहे हैं।"
चार मोर्चों पर काम कर रही सरकार
दिल्ली सरकार चार मुख्य मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है - वाहनों से होने वाला प्रदूषण, धूल नियंत्रण, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग और कचरा प्रबंधन - जिसमें सिविक एजेंसियां 24 घंटे हस्तक्षेप किया जा रहा है।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर धूल के सख्त नियम, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, एंटी-स्मॉग गन और बिजली के खंभों पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम हवा में मौजूद कणों से असरदार तरीके से निपट रहे हैं।
जिला मजिस्ट्रेट और डिविजनल कमिश्नर की देखरेख में सर्वे के जरिये प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज के खिलाफ कार्रवाई चल रही है, जबकि सड़कों से कचरा उठाने और सभी लैंडफिल साइट्स पर बायो-माइनिंग की प्रक्रिया से रोजाना लगभग 35 मीट्रिक टन पुराने कचरे को प्रोसेस किया जा रहा है, जिससे कचरे के पहाड़ों में काफी कमी आ रही है।




साइन इन