दिल्ली के इन इलाकों में बनेंगे 5 ऑटोमेटेड वाहन फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन, CM रेखा गुप्ता ने किया ऐलान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तेजी से ऑटोमेटेड कॉमर्शियल व्हीकल फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तेजी से ऑटोमेटेड कॉमर्शियल व्हीकल फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। झुलझुली फिटनेस सेंटर में प्रत्येक वर्ष 70 हजार वाहनों की जांच हो रही है। बुराड़ी फिटनेस सेंटर को अपग्रेड किया जा रहा है, जबकि दो अन्य केन्द्र नंदनगरी व तेहखंड में बनाए जा रहे हैं। यह दोनों अगले वर्ष मार्च में काम करने लगेंगे। ये चारों सेंटर हर साल ढाई से तीन लाख कॉमर्शियल गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, विभिन्न डीटीसी डिपो पर भी ऐसे ही 5 ऑटोमेटेड व्हीकल फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन (बवाना, गाजीपुर, सावदा घेवरा, जीटीके डिपो, दिचाऊं कला) में लगाने का निर्णय लिया गया है।
वहीं, कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली में शेयर टैक्सी सेवाएं उपलब्ध थीं, लेकिन कुछ कारणों के चलते इन्हें बंद कर दिया गया था। अब सरकार इन्हें दोबारा शुरू कराकर यात्रियों को किफायती और सुविधाजनक साझा परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जल्द ही ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क कंपनियों के साथ एक विशेष बैठक होगी, जिसमें साझा टैक्सी सेवाओं को दोबारा शुरू करने, महिला चालकों की संख्या बढ़ाने और निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्सी सेवा से जोड़ने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
सरकार का प्रयास है कि अधिक यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती परिवहन उपलब्ध कराया जाए, जिससे सड़कों पर भीड़ घटे और प्रदूषण में कमी आए।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार राजधानी की टैक्सी सेवाओं में महिला चालकों की संख्या भी बढ़ाना चाहती है, ताकि महिला यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का भी विकल्प मिल सकें।
मेट्रो की नई लाइनें भी घटाएंगी यातायात
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विभिन्न शोध बताते हैं कि वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इसलिए दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने के लिए लगातार निवेश कर रही है। मेट्रो, बस और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार की दीर्घकालीन परिवहन नीति का आधार बनाया गया है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली मेट्रो के फेज-5ए के कुछ कॉरिडोरों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है, जिससे भविष्य में मेट्रो नेटवर्क का और विस्तार संभव होगा। इससे सड़क पर यातायात का दबाव कम होगा और प्रदूषण नियंत्रण को स्थायी समाधान मिलेगा।




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