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मालवीय नगर अग्निकांड: हादसे पर हादसे, HC के 5 माह पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 महीने पहले होटलों में फायर सेफ्टी ऑडिट और सख्त नियम बनाने का आदेश दिया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। नतीजतन, दिल्ली के एक और होटल में 21 लोगों की मौत हो गई। 

Wed, 3 June 2026 07:17 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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मालवीय नगर अग्निकांड: हादसे पर हादसे, HC के 5 माह पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन

दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल में बुधवार को भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। 'होटल फ्लोरिश स्टे बेड-एंड-ब्रेकफास्ट' में हुए भीषण अग्निकांड में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है। होटल में आवाजाही के लिए केवल एक ही मुख्य दरवाजा था। होटल में केवल 6 कमरों की अनुमति थी लेकिन 25 कमरों में करीब 40 लोगों को ठहराया गया था।सनद रहे यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब करीब 5 महीने पहले दिल्ली हाई कोर्ट के शहर के अधिकारियों को राजधानी भर के होटलों, रेस्टोरेंट और दूसरी हॉस्पिटैलिटी जगहों पर फायर सुरक्षा के नाकाफी उपायों पर चिंताओं को तुरंत दूर करने का निर्देश दिया था।

हालांकि याचिकाकर्ता अर्पित भार्गव के अनुसार, अधिकारियों ने अभी तक उच्च न्यायालय के 7 जनवरी के आदेश का पालन नहीं किया है, जिसमें उन्हें इस मुद्दे को उठाने वाली एक जनहित याचिका की जांच करने एवं सेफ्टी स्टैंडर्ड को मजबूत करने के साथ ही आग से जुड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक बड़ी कार्य योजना बनाने की जरूरत थी।

हाल के सालों में दिल्ली में आग लगने की सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक मालवीय नगर के हौज रानी में फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग के बाद यह आदेश और भी अहम हो गया है। भार्गव ने दावा किया कि उन्होंने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, दिल्ली दिल्ली नगर निगम आयुक्त व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष को आदेश मानने के लिए बार-बार स्मरणपत्र भेजे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

6 दिसंबर 2025 को गोवा के एक नाइट क्लब में आग लगने से 25 लोगों की मौत के बाद दायर की गई जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि दिल्ली में कई जगहें सुरक्षा नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए चल रही हैं। अधिवक्ता भार्गव ने बताया कि अदालत की कार्ययोजना बनाने के साफ निर्देशों के बावजूद कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसको लेकर संबंधित लोगों को कई बार पत्र भेजा गया। लेकिन इन पर ध्यान नहीं दिया गया। पूरी तरह से लापरवाही बरती गई और आज ये हादसा हो गया।

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अधिवक्ता अपर्ति भार्गव ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में लगभग एक हजार लाइसेंस्ड हॉस्पिटैलिटी जगहों में से सिर्फ़ 52 होटलों व 38 क्लबों के पास दिल्ली फायर सर्विसेज़ से फायर सुरक्षा के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र है। बाकी सभी बगैर एनओसी चल रहे हैं।

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जनहित याचिका में अधिकारियों को सभी होटलों, क्लबों, रेस्टोरेंट वगैरह का फायर सुरक्षा समेत सुरक्षा ऑडिट करने व सुधार के कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। होटलों में आग लगने की घटनाओं से प्रभावित लोगों के लिए मुआवज़े की योजना बनाने की मांग के अलावा, इसमें उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है जो नियमित तौर पर होटलों, क्लबों, रेस्टोरेंट वगैरह का निरीक्षण नहीं करते हैं।

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