फरीदाबाद की SBI बैंक से गायब हुआ लॉकर, CA का दावा- तिजोरी में था 1.2 Kg सोना, 3 Kg चांदी
यहां एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के लॉकर में रखे करीब 2 करोड़ के सोने-चांदी और कीमती सामान के कथित रूप से गायब होने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि बैंक रिकॉर्ड में वह लॉकर अब उनके नाम पर मौजूद ही नहीं है, जबकि वर्षों तक उसकी फीस खाते से कटती रही।

फरीदाबाद के सेक्टर-15 मार्केट स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के लॉकर में रखे करीब 2 करोड़ के सोने-चांदी और कीमती सामान के कथित रूप से गायब होने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि बैंक रिकॉर्ड में वह लॉकर अब उनके नाम पर मौजूद ही नहीं है, जबकि वर्षों तक उसकी फीस खाते से कटती रही।
CA ने 2014 में खुलाया था लॉकर
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक- पीड़ित CA डीसी गर्ग ने बताया, उन्होंने वर्ष 2014 में SBI की इस शाखा में लॉकर लिया था और पिछले 12 सालों से उसका नियमित उपयोग कर रहे थे। दो दिन पहले जब उनकी पत्नी लॉकर ऑपरेट करने बैंक पहुंचीं, तो बैंक कर्मचारियों ने बताया कि उस नंबर का कोई लॉकर शाखा में मौजूद ही नहीं है। यह सुनकर परिवार हैरान रह गया, क्योंकि लॉकर की सालाना फीस 2,360 उनके खाते से पिछले साल तक कटती रही थी।
लॉकर किसी और को कर दिया अलॉट
सूचना मिलने के बाद डीसी गर्ग परिवार के साथ बैंक पहुंचे और अधिकारियों से सवाल किए। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि उनके नाम से कोई लॉकर रजिस्टर्ड नहीं है। गर्ग का कहना है कि आज भी उनके पास लॉकर की ओरिजिनल चाबी मौजूद है, जबकि बैंक का दावा है कि वही लॉकर नंबर किसी अन्य व्यक्ति को अलॉट कर दिया गया है।
लॉकर में 1.2 Kg सोने की ईंट, 3 Kg चांदी…
डीसी गर्ग ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से उनका लॉकर तोड़ा गया और बाद में उसे विकास चौहान नामक व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया। उनका कहना है कि लॉकर में करीब 1.25 किलो सोने की ईंटें, लगभग 3 किलो चांदी और अन्य कीमती सामान रखा था। उन्हें यह भी नहीं पता कि लॉकर कब तोड़ा गया और सामान कब गायब हुआ।
गर्ग ने बैंक के इस दावे को भी खारिज किया कि उन्होंने पहले ही लॉकर सरेंडर कर दिया था। उन्होंने कहा कि लॉकर सरेंडर करने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसमें कागजी कार्रवाई और ओरिजिनल चाबी बैंक को सौंपनी पड़ती है, जबकि चाबी आज भी उनके पास है।
सीए ने दर्ज कराई शिकायत
इस मामले को लेकर डीसी गर्ग ने SBI मुख्यालय और बैंक के चेयरमैन से शिकायत की है, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी जांच में जुटे हैं। वहीं, गर्ग के सहयोगी और जिला उपभोक्ता फोरम के पूर्व सदस्य सतीश मित्तल ने भी बैंक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर बैंक कर्मचारी दोषी नहीं हैं, तो मामले को दबाने के बजाय पारदर्शी जांच क्यों नहीं की जा रही। मित्तल ने बताया कि पुलिस में भी शिकायत दी गई है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।




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