जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल के 'दांव' की निकाल दी काट, कर दिया इंसाफ का इंतजाम
जस्टिस स्वर्ण कांता ने कहा है कि वह केजरीवाल समेत तीन 'आप' नेताओं के लिए न्याय मित्र की नियुक्ति करेंगी। केजरीवाल-सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने कहा था कि वह अपनी तरफ से कोई वकील अदालत में नहीं भेजे

दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के 'बहिष्कार दांव' की काट निकाल दी है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने तीनों आप नेताओं के लिए एमिकस (न्याय मित्र) की नियुक्ति का ऐलान किया है। अदालत ने कहा कि इनके लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त किए जाएंगे जो केजरीवाल और अन्य की तरफ से दलीलें पेश करेंगे।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पूछा कि कौन-कौन प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ है। एसजी तुषार मेहता ने कहा कि केजरीवाल, सिसोदिया व दुर्गेश पाठक पेश नहीं हुए हैं। इस पर न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि इन तीनों की तरफ से जिरह के लिए एमिकस (न्यायमिमत्र) के तौर पर एक वरिष्ठ वकील को नियुक्त किया जाए। उसके बाद ही सीबीआई की दलीलें सुनना उचित होगा।
एक प्रतिवादी का ‘जवाब का अधिकार समाप्त’
जस्टिस शर्मा ने कहा कि शुक्रवार को केजरीवाल, सिसोदिया व दुर्गेश पाठक की तरफ से एमिकस नियुक्त किए जाने के बाद ही सीबीआई की दलीलें सुनी जाएंगी। जस्टिस शर्मा को सूचित किया गया है कि एक प्रतिवादी ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर पीठ ने कहा कि उनका जवाब दाखिल करने का अधिकार समाप्त किया जाता है। इस मामले की सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
क्यों केजरीवाल-सिसोदिया ने नहीं भेजा वकील
दरअसल, हाई कोर्ट में कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई चल रही है। ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले को सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता कर रही हैं। केजरीवाल चाहते थे कि इस केस को किसी और जज के पास ट्रांसफर किया जाए। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की ओर से अपील खारिज किए जाने के बाद केजरीवाल ने रिक्यूजल याचिका दायर की थी। आप प्रमुख ने अदालत में खड़े होकर जज पर कई आरोप लगाए और कहा कि उनसे न्याय की उम्मीद नहीं है।
अदालत ने केजरीवाल की सभी शंकाओं का जवाब देते हुए बताया कि जस्टिस स्वर्ण कांता ही सुनवाई करेंगी। इसके बाद केजरीवाल ने बहिष्कार का ऐलान कर दिया। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने सार्वजनिक खत लिखकर इस बात की घोषणा की कि वे ना तो खुद कोर्ट में पेश होंगे और ना ही कोई वकील उनकी ओर से दलीलें रखेंगे। केजरीवाल ने हितों के टकराव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जस्टिस स्वर्ण कांता के बच्चे सरकारी वकीलों के पैनल में हैं और उन्हें एसजी केसों का आवंटन करते हैं। चूंकि जज के बच्चों का भविष्य सीबीआई का पक्ष रख रहे एसजी के हाथ है, इसलिए उन्हें नहीं लगता कि जज सीबीआई के खिलाफ फैसला दे सकती हैं।




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