justice after 34 years over Rs 20 discrepancy delhi high court orders reinstatement of dismissed DTC bus conductor 20 रुपये की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, DTC के बर्खास्त कंडक्टर को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बहाल, Ncr Hindi News - Hindustan
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20 रुपये की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, DTC के बर्खास्त कंडक्टर को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बहाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 रुपये की गड़बड़ी करने वाले DTC के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को 34 साल बाद राहत देते हुए ड्यूटी पर बहाल करने के आदेश दिए हैं। इस बस कंडक्टर पर सवारियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट नहीं देने का आरोप था।

Tue, 26 May 2026 03:24 PMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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20 रुपये की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, DTC के बर्खास्त कंडक्टर को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बहाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने एक केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दरअसल, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को महज 20 रुपये की गड़बड़ी करना बड़ा महंगा पड़ गया। अपनी इस गलती के लिए आरोपी कंडक्टर को 34 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस बस कंडक्टर को राहत देते हुए उसकी बहाली के आदेश दिए हैं। इस बस कंडक्टर पर सवारियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट नहीं देने का आरोप था।

चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने डीटीसी को कहा है कि इस बस कंडक्टर को नौकरी पर बहाल किया जाए। इसके साथ ही बेंच ने यह भी कहा कि बस कंडक्टर की गलती को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए कंडक्टर को उसके पिछले वेतन का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

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बेंच ने माना कि बेशक बस कंडक्टर को पुन: बहाली का आदेश दिया जा रहा है। इसकी वजह डीटीसी की जांच टीम की कुछ खामियां रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि 20 रुपये की गड़बड़ी हुई थी। इसकी जिम्मेदारी बस कंडक्टर की बनती है। इसलिए उसे राहत के साथ ही इसका खामियाजा भी भुगतान पड़ेगा।

यात्रियों को गवाह नहीं बनाया गया

इस मामले में डीटीसी की जांच टीम की खामी रही कि उसने उन यात्रियों को गवाह नहीं बनाया, जिन्होंने दो-दो रुपये बस कंडक्टर को दिए थे। इतना ही नहीं इस टीम द्वारा 20 रुपये की वह रकम भी बस कंडक्टर से बरामद भी नहीं की गई। हाईकोर्ट द्वारा आरोपी कंडक्टर को संदेह का लाभ देने का यही आधार बना।

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लाभों से वंचित किया

इस मामले में पहले कड़कड़डूमा कोर्ट की श्रम अदालत और फिर दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि बस कंडक्टर की गलतियां रही हैं। इसलिए वह बकाये वेतन औन वरिष्ठता आदि लाभ पाने का हकदार नहीं है।

दस यात्रियों से दो-दो रुपये लिए थे

आरोपी बस कंडक्टर 24 अप्रैल 1992 को बादशाहपुर रूट पर ड्यूटी पर था। डीटीसी की निरीक्षण टीम ने रास्ते में जब बस को रोककर जब सवारियों की टिकट जांच की तो पाया कि कंडक्टर द्वारा बस में सवार 5 यात्रियों से टिकट के लिए 2-2 रुपये तो लिए गए थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। इसी तरह जांच टीम ने निरीक्षण के दौरान भोंडसी में फिर पाया कि 5 यात्रियों से 2-2 रुपये लिए गए, लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया। निरीक्षण टीम ने इसकी जानकारी विभाग को दी। इसके बाद डीटीसी ने कंडक्टर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।

रिपोर्ट - हेमलता कौशिक

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