DTC bus driver job applied in jawani but after 17 Years man won legal battle in delhi high court जवानी में किया अप्लाई, DTC में 17 साल बाद मिलेगी सरकारी नौकरी; दिल्ली हाईकोर्ट में जीती जंग, Ncr Hindi News - Hindustan
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जवानी में किया अप्लाई, DTC में 17 साल बाद मिलेगी सरकारी नौकरी; दिल्ली हाईकोर्ट में जीती जंग

एक व्यक्ति ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में ड्राइवर की नौकरी पाने के लिए 17 साल कानूनी जंग लड़ी। अब जाकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर 46 वर्ष की उम्र में इस व्यक्ति को डीटीसी में ड्राइवर के पद पर नौकरी मिलेगी।

Sat, 4 April 2026 05:32 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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जवानी में किया अप्लाई, DTC में 17 साल बाद मिलेगी सरकारी नौकरी; दिल्ली हाईकोर्ट में जीती जंग

एक व्यक्ति ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में ड्राइवर की नौकरी पाने के लिए 17 साल कानूनी जंग लड़ी। अब जाकर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर 46 वर्ष की उम्र में इस व्यक्ति को डीटीसी में ड्राइवर के पद पर नौकरी मिलेगी।

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने इस व्यक्ति के हक में फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को डीटीसी में ड्राइवर के पद पर दो महीने के भीतर नियुक्ति दी जाए। बेंच ने कहा कि यहां मुद्दा आरक्षण को लेकर था। यह व्यक्ति उत्तर प्रदेश का निवासी है, जहां उसकी जाति अनुसूचित वर्ग में आती है, लेकिन दिल्ली में उसकी जाति आरक्षण श्रेणी में नहीं आती। इसी के चलते इस व्यक्ति को तमाम मापदंड पूरे होने के बाद भी नौकरी पर नहीं रखा गया।

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दूसरे प्रदेश का आरक्षण दिल्ली में देना कानून सम्मत

बेंच ने स्पष्ट किया कि दिल्ली केन्द्र शासित राज्य हैं। यहां देशभर के अलग-अलग राज्यों से लोग नौकरी करने आते हैं। ऐसे में दूसरे प्रदेश का आरक्षण दिल्ली राज्य के अंदर दिया जाना कानून सम्मत है। हालांकि, बेंच ने कहा कि इस व्यक्ति को नौकरी पर रखते समय उसकी इस समय की योग्यता को परखने का अधिकार संबंधित विभाग को दिया जा रहा है।

46 साल की उम्र में नौकरी मिली

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि उसने वर्ष 2009 में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के तहत डीटीसी में ड्राइवर पद के लिए आवेदन किया था। उस समय उसकी उम्र 29 साल थी। याचिकाकर्ता ने डीएसएसएसबी द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद कौशल परीक्षण में सफलता पाई। मगर जब दस्तावेजों के सत्यापन का समय आया तो विभाग ने उसकी उम्मीदवारी यह कहकर खारिज कर दी कि उसने अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण श्रेणी में आवेदन किया था। उसकी जाति उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति आरक्षण की श्रेणी में आती है। दिल्ली में उसकी जाति को अनुसूचित श्रेणी में आरक्षण प्राप्त नहीं है। मगर अब हाईकोर्ट ने उसकी उम्मीदवारी को सही ठहराया है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने बीर सिंह बनाम दिल्ली जल बोर्ड मामले में कहा था कि केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को उनके प्रदेश में मिले अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश है। यहां पूरे देश के नियम-कानून मान्य हैं। ऐसे में दूसरे प्रदेश के आरक्षण को मानना कानूनन सही है।

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