बचपन में हुई गलती को जीवनभर का कलंक नहीं बनाया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट
याचिकाककर्ता युवक ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि 26 साल पहले जब वह नाबालिग था, उसके खिलाफ दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में एक युवक को बड़ी राहत देते हुए राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) को किशोरावस्था के उसके आपराधिक रिकॉर्ड हटाने का निर्देश दिया है। पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के कारण युवक का पासपोर्ट जारी नहीं हो पा रहा था।
जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा कि किशोरों को ‘भूल जाने का अधिकार’ पूरी तरह प्राप्त है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा-24 का उद्देश्य नाबालिगों के भविष्य को सुरक्षित रखना है, इसलिए बचपन में हुई गलती को जीवनभर का कलंक नहीं बनाया जा सकता।
क्या था युवक का अपराध
युवक ने हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 2000 में, जब वह नाबालिग था, उसके खिलाफ न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। उस पर आरोप था कि उसने डीटीसी बस में यात्रा के दौरान फर्जी पास का इस्तेमाल किया था। जांच के बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां जुर्माना भरने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। अब यही अपराध उसकी परेशानी बन गया है।
पासपोर्ट बनवाने पहुंचा तो रद्द कर दिया गया था आवेदन
याचिकाकर्ता ने बताया कि पिछले साल उसने विदेश में नौकरी के लिए पासपोर्ट आवेदन किया था, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन में उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने पर पासपोर्ट आवेदन रद्द कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड होने के कारण पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मुकदमा समाप्त होने के बाद किशोर के अपराध को न तो अयोग्यता माना जा सकता है और न कलंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने एससीआरबी को निर्देश दिया कि युवक का रिकॉर्ड तुरंत हटाया जाए।




साइन इन