Judge Swarna Kanta Sharma appoint Amicus Curiae in Arvind Kejriwal Excise Case know what is this and why important केजरीवाल पर सुनवाई से पहले ही जज स्वर्ण कांता शर्मा का 'इंसाफ'; क्या होता है एमिकस क्यूरी, Ncr Hindi News - Hindustan
More

केजरीवाल पर सुनवाई से पहले ही जज स्वर्ण कांता शर्मा का 'इंसाफ'; क्या होता है एमिकस क्यूरी

दिल्ली हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी केस में केजरीवाल और सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों के लिए एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की है। वकीलों की नियुक्ति इसलिए की गई है ताकि सुनवाई आगे चल सके।

Wed, 6 May 2026 09:59 AMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
केजरीवाल पर सुनवाई से पहले ही जज स्वर्ण कांता शर्मा का 'इंसाफ'; क्या होता है एमिकस क्यूरी

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े आबकारी नीति से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाया। आम आदमी पार्टी के प्रमुख केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपी जज शर्मा के सामने सुनवाई का बहिष्कार का ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने उनकी अदालत पेश न होने और न ही वकील रखने का ऐलान किया है। इसके बावजूद कोर्ट ने मामले को आगे बढ़ाने का रास्ता निकाल लिया। अदालत ने साफ किया कि आरोपियों की गैरमौजूदगी में भी उनके पक्ष को रखा जाएगा और इसके लिए ‘एमिकस क्यूरी’ यानी न्याय मित्र नियुक्त किए जाएंगे।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि जब तक आरोपियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तब तक सुनवाई आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट अब तीन वरिष्ठ वकीलों को न्याय मित्र के तौर पर नियुक्त करने जा रही है और इसके बाद ही केस की सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल मामले की अगली तारीख 8 मई तय की गई है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल-सिसोदिया के 'दांव' की निकाल दी काट

कोर्ट के आदेश पर न्याय मित्र की नियुक्ति

यह मामला सीबीआई की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत के बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है। निचली अदालत केजरीवाल को आरोपों से बरी कर चुकी है। बिना बचाव पक्ष के तर्क सुने सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए जज स्वर्ण कांता शर्मा ने तीन वरिष्ठ वकीलों को ‘न्याय मित्र’ नियुक्त करने का फैसला लिया है, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

क्या होता है एमिकस क्यूरी?

‘एमिकस क्यूरी’ का मतलब होता है “न्याय मित्र”। यह आमतौर पर कोई अनुभवी और निष्पक्ष वकील होता है, जिसे अदालत किसी जटिल या संवेदनशील मामले में मदद के लिए नियुक्त करती है। इसका काम किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि अदालत को एक निष्पक्ष दृष्टिकोण देना होता है, ताकि सही फैसला लिया जा सके।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:केजरीवाल अगले सरप्राइज को तैयार रहें! राघव चड्ढा-मान की टाइमिंग पर किसकी चेतावनी

एमिकस क्यूरी क्यों जरूरी

कई बार अदालतों के सामने ऐसे मामले आते हैं जो सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि तकनीकी, सामाजिक या संवैधानिक तौर पर भी काफी जटिल होते हैं। हर विषय में विशेषज्ञ होना अदालत के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में कोर्ट एक निष्पक्ष और अनुभवी व्यक्ति अक्सर वरिष्ठ वकील को ‘एमिकस क्यूरी’ यानी कोर्ट का मित्र नियुक्त करता है, ताकि वह मामले पर स्वतंत्र और संतुलित राय दे सके।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मैं 3000 वोट से हार गया; ममता बनर्जी की हार को दिल्ली से क्यों जोड़ रहे केजरीवाल

कानूनी आधार

भारतीय संविधान में ‘एमिकस क्यूरी’ का सीधे तौर पर जिक्र नहीं मिलता, लेकिन अदालतों को जो व्यापक अधिकार मिले हैं, जैसे अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत वे जरूरत पड़ने पर इनकी नियुक्ति कर सकती हैं। खासकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ऐसे विशेषज्ञों को शामिल करते हैं।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।