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कैसे पुलिस और जलबोर्ड की लापरवाही ने ली कमल की जान? पूरी टाइमलाइन देखिए

दिल्ली के जनकपुरी में जलबोर्ड के खुले गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय कमल की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सटीक लोकेशन मिलने के बावजूद पुलिस ने समय रहते सघन तलाशी नहीं की, जिससे युवक की जान चली गई।

Sat, 7 Feb 2026 06:14 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कैसे पुलिस और जलबोर्ड की लापरवाही ने ली कमल की जान? पूरी टाइमलाइन देखिए

जनकपुरी इलाके में जलबोर्ड की ओर से खोदे गए 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल की मौत के लिए केवल जलबोर्ड ही जिम्मेदार नहीं है। दिल्ली पुलिस और अन्य सिविक एजेंसियों की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है। जिस सड़क पर हादसा हुआ है वहां घना अंधेरा रहता है और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है।

परिजन बेटे के न मिलने की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे तो उन्हें थाने दर थाने घूमना पड़ा। पुलिस ने पीड़ित कमल के मोबाइल की पिन प्वॉइंट लोकेशन निकाल ली, लेकिन उस तक नहीं पहुंच पाई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पहले उन्हें लोकेशन शेयर की फिर वह सुरक्षा का हवाला देते हुए डिलीट कर दी। पुलिस अगर रात ही उस लोकेशन के जरिए सघन तलाशी अभियान चलाती तो शायद कमल को समय रहते गड्ढे से निकाल कर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था, जिससे उसकी जान बच जाती। लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया और पुलिस ने परिजनों से सुबह आने की बात कहकर उन्हें घर भेज दिया।

कमल को ढूंढ़ने के लिए 200 मीटर में चलाना था अभियान

कमल के दोस्त अल्ताफ ने बताया कि जब वे लोग जनकपुरी थाने पहुंचे तो पहले पुलिस ने गुमशुदगी को 24 घंटे पूरे होने पर शिकायत लेने की बात कही। परिजनों के बार-बार अग्राह करने पर परिजनों ने कमल के फोन की लोकेशन निकाली। पुलिसकर्मियों ने बताया कि फोन की लोकेशन पार्क के पास आ रही है। लोकेशन मिलने के बाद परिजन दो पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और वहां कमल को ढूंढ़ना शुरू किया। पुलिसकर्मी पार्क की तलाशी के बाद चले गए। जबकि पार्क के सामने बने गड्ढे में कमल बेसुध हालत में पड़ा था। परिजनों का आरोप है कि लोकेशन मिलने के बाद पुलिस को केवल 200 मीटर के दायरे में तलाशी अभियान चलाना था। अगर उस समय पुलिसकर्मी मामले को गंभीरता से लेते थे शायद कमल रात को ही गड्ढे में मिल जाता।

जनकपुरी हादसा

कमल से 11:53 पर हुई थी अंतिम बार बात

कमल के भाई मयंक ने बताया कि गुरुवार देर रात कमल अपने रोहिणी स्थित ऑफिस से काम खत्म कर घर लौट रहा था। थोड़ी देर होने पर करीब 11:53 पर उसे फोन किया तो उसने फोन उठाकर बताया कि वह जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर पहुंच गया है और लगभग 15 मिनट में घर पहुंच जाएगा। घर लौटते समय उसके साथ हादसा हो गया और जब वह 12:30 तक घर नहीं लौटा तो उसे दोबारा फोन किया, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। मयंक ने बताया कि उसके बाद से वह लगातार फोन मिलाते रहे, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।

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चौकी से लेकर थाने तक काटते रहे चक्कर

मयंक ध्यानी ने बताया कि काफी देर होने के बाद जब कमल घर नहीं लौटा तो वह अपने दोस्तों के साथ पहले कैलाशपुरी पुलिस चौकी पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि सागपुर थाने के अंतर्गत आने वाली इस चौकी में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि ऐसे मामले रोज होते हैं। उन्होंने सिर्फ युवक का नाम, बाइक नंबर, फोन नंबर और फोटो लेकर उसे व व्हाट्सऐप ग्रुप में डालने की बात कही। इसके बाद परिजनों ने डाबड़ी, जनकपुरी, रोहिणी, विकासपुरी सहित करीब छह थानों में कमल की तलाश में चक्कर काटे, लेकिन पुलिस ने कहीं भी उनका सहयोग नहीं किया।

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चार माह से सड़क पर पर नहीं लगाए गए बैरिकेड

जनकपुरी में जहां हादसा हुआ है, वहां अक्तूबर माह से सड़क पर पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्तूबर में सड़क खोदी गई थी। इसके बाद एक सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। लेकिन सड़क के दोनों और एक-एक बैरिकेड खड़ा कर दिया गया, लेकिन उसे पूरी तरह से बंद नहीं किया। इसके चलते अंधेरे में सड़क पर गड्ढे दिखाई ही नहीं देते है। सड़क यातायात के लिए पूरी तरह से बंद है तो बैरिकेड लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया जाना चाहिए, जिससे कोई हादसा न हो, लेकिन विभाग की ओर से ऐसा नहीं किया गया।

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कल दिन में ही खोदा गया था गड्ढा

जिस गड्ढे में गिरकर कमल की मौत हुई है। वह गड्ढा गुरुवार दोपहर को ही खोदा गया था। सड़क पर पहले से गड्ढा बना हुआ था, लेकिन पाइप डालने के लिए उसे गहरा करना था। गुरुवार को जलबोर्ड के कर्मचरियों ने क्रेन से वह गड्ढा गहरा कर दिया था, जिसमें अलगे दिन पाइप लाइन डालने का काम करना था। लेकिन शाम को जब कम बंद किया गया तो सड़क को बंद नहीं किया गया।

हादसे वाले गड्ढे के पास ही सोए थे मजदूर

जिस गड्ढे में गिरकर कमल की मौत हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वहां काम करने वाले मजदूरों ने अपनी झुग्गी बनाई हुई थी। इस झुग्गी में मजदूर रोज काम के बाद सोते थे। हादसे वाले दिन भी रात को मजदूर वहां मौजूद थे। ऐसे में जब हादसा हुआ तो मजदूरों को उसके बारे में पता कैसे नहीं चला क्योंकि गड्ढे और मजदूरों की झुग्गी के बीच की दूसरी मात्र पांच मीटर की है।

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घटना की पूरी टाइमलाइन

  • 11:15 बजे: रात ऑफिस से घर के लिए निकला था कमल
  • 11:53 बजे: रात में भाई से अंतिम बार बात हुई थी
  • 12:05 बजे: गड्ढे में बाइक सहित गिरा था कमल
  • 01:15 बजे: परिजनों ने फोन न उठाने पर तलाश शुरू की
  • 02:45 बजे: कमल का भाई जनकपुरी थाने पहुंचा
  • 03:00 बजे: करीब पुलिस को कमल की मोबाइल लोकेशन मिली
  • 07:30 बजे: सुबह तक परिजन, पुलिस युवक को ढूंढ़ते रहे
  • 08:03 बजे: सुबह पुलिस को महिला ने फोन कर गड्ढे में गिरने की सूचना दी
  • 08:10 बजे: सूचना मिलने के बाद परिजन मौके पर पहुंचे

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