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गड्ढे के पास से कई बार गुजरा पर नजर नहीं पड़ी... कहकर रोने लगे कमल के पिता

दिल्ली के जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से जुड़वा भाई कमल की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सरकार की लापरवाही ने उनके बेटे की जान ली, जो रातभर घर से कुछ ही दूरी पर गड्ढे में पड़ा रहा और किसी को नहीं दिखा।

Sat, 7 Feb 2026 05:54 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गड्ढे के पास से कई बार गुजरा पर नजर नहीं पड़ी... कहकर रोने लगे कमल के पिता

डीडीयू अस्पताल से बेटे कमल का शव जब घर पहुंचा तो परिजन ही नहीं पूरे गढ़वाल मोहल्ले में चीख पुकार मच गई। हर आंखों में आंसू था, कोई भी यह विश्वास नहीं कर पा रहा था कि कमल अब इस दुनिया में नहीं हैं।

शव के घर पहुंचने से पहले शांत बैठे कमल के पिता नरेश ध्यानी का सब्र टूट गया और वह चीख कर बोले मेरा बेटा पूरी रात गड्ढे में पड़ा रहा और हम वहां से कई बार गुजरे। लेकिन एक बार भी गड्ढे में नहीं देख पाए। इतना कहते ही वह रोने लगे। कमल के पिता नरेश ध्यानी ने बताया कि वह सात लोग पूरी रात उसे ढूंढ रहे थे। उन्हें एक बार भी नहीं लगा कि वह गड्ढे में गिर गया होगा। अगर ऐसा होता तो वह वहां जरूर चैक करते।

तीन साल पहले खरीदी थी बाइक, आनलाइन मंगवाया था हेलमेट

कमल के भाई ने बताया कि उसने अपने पैसे से तीन साल पहले बाइक खरीदी थी। उसे बाइक चलाने का शौक था। उसने राइडिंग के लिए विशेष हेलमेट ऑनलाइन मंगवाया था। हादसे के समय उसने अपना वहीं हेलमेट पहना हुआ था। भाई इतना कहते हुए रोने लगा और बोला कि सरकार की लापरवाही के चलते उसका भाई हमेशा के लिए चला गया।

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उत्तराखंड से आकर बसा था परिवार

कैलाशपुरी में रहने वाले नरेश ध्यानी मूलत: गांव पोखरा, जिला गढवाल, उत्तराखंड़ के रहने वाले हैं। नरेश ध्यानी के परिजन लंबे समय पहले दिल्ली के राजघाट इलाके में आकर रहने लगे थे। करीब 26 साल पहले कैलाशपुरी इलाके में मंदिर बनाया गया। जिसमें पंडित की जरूरत थी। कैलाशपुरी में जिस जगह यह मंदिर बनाया गया वह मोहल्ला गढ़वाल मोहल्ले के नाम से मशहूर क्योंकि यहां ज्यादात्तर आबादी उत्तराखंड़ से आकर बसी हैं। ऐसे में लोगों ने नरेश ध्यानी को मंदिर में पंड़ित के रूप में बुलाया और फिर वह मंदिर के उपर ही रहने लगे।

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जुड़वा भाई थे करण और कमल

कमल की रिश्तेदार सुनीता पंत ने बताया कि करण और कमल दोनों जुड़वा भाई थे। दोनों भाईयों का जन्म एक ही दिन हुआ था और कमल करण से मात्र 4 मिनट छोटा था। सुनीता पंत ने बताया कि परिवार में माता-पिता के अलावा मयंक, करण और कमल तीन भाई थे।मयंक आफिस मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है। जबकि करण और कमल नौकरी करते थे। तीनों बच्चे पढ़ाई में बहुत होशियार थे।

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पुलिस बोली हमने की थी कोशिश

पश्चिमी दिल्ली पुलिस उपायुक्त डी शरद भास्कर ने बताया कि गुरुवार देर रात जनकपुरी थाने को कमल के गायब होने की सूचना लेकर परिजन 2.50 बजे पहुंचे थे। वहां एसआई अवंत उन्हें मिले। एसआई ने तुंरत कार्रवाई की और कमल के फोन की लोकेशन निकाली। लोकेशन पोसंगीपुर पार्क की थी। पुलिस टीम ने परिजनों के साथ लोकेशन के आधार पर पार्क और कॉलोनी की तलाशी ली। लेकिन कमल नहीं मिला। शुक्रवार सुबह करीब 8:03 बजे एक महिला द्वारा कॉल पर जनकपुरी के आंध्र स्कूल के पास गड्डे में युवक गिरे होने की सूचना मिली थी।

घटना के बाद से इलाकों के लोग गमगीन हैं और विभाग की लापरवाही को सीधे ताैर पर जिम्मेदार मान रहे हैं।

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