मिसाइल के धमाकों से सो नहीं पा रहीं बेटियां, ईरान में फंसी MBBS छात्रा के पिता का दर्द
ईरान पर इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट के देशों में बेहद तनावपूर्ण स्थिति बन गया है। इस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच वहां शिक्षा और रोजगार के लिए भारतीयों में डर और चिंता का माहौल है।

ईरान पर इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट के देशों में बेहद तनावपूर्ण स्थिति बन गया है। इस बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच वहां शिक्षा और रोजगार के लिए भारतीयों में डर और चिंता का माहौल है। तेहरान में फंसी एक भारतीय मेडिकल स्टूडेंट के पिता कुंवर शकील अहमद ने अपनी बेटी की आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता जताते हुए मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
शकील अहमद ने कहा कि मैं दिल्ली से हूं और मेरी बेटी ईरान में MBBS की पढ़ाई कर रही है। उसका छठा सेमेस्टर अभी शुरू हुआ है। जब हमने उसे वहां भेजा था, तो हमने कभी ऐसे हालात के बारे में सोचा भी नहीं था। वहां की लड़कियां ब्लास्ट और मिसाइल की आवाजों के कारण रात में सो नहीं पातीं।
वहां हालात बहुत डरावने हैं : शकील
उन्होंने कहा कि आज सुबह मेरी बेटी ने मुझे बताया कि पास में हुए एक धमाके के बाद उसके हॉस्टल की छत से प्लास्टर गिर गया है। वहां हालात बहुत डरावने हैं। मेरी बेटी ने NEET क्वालिफाई कर लिया था, लेकिन भारत में MBBS की पढ़ाई बहुत महंगी है, इसलिए हमें उसे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए ईरान भेजना पड़ा। इससे पहले, इजराइल-ईरान झगड़े के दौरान, भारत सरकार ने स्टूडेंट्स को सुरक्षित वापस लाने में मदद की थी।
शकील अहमद ने कहा कि मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह NMC नियमों के बावजूद, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान दिए गए स्पेशल प्रोविजन की तरह स्टूडेंट्स को एक बार फिर से कहीं और शिफ्ट होने या पढ़ाई जारी रखने की इजाजत दे। उन्होंने कहा कि अगर भारत में सस्ते मेडिकल कॉलेज और ज्यादा सीटें होतीं, तो माता-पिता को अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश नहीं भेजना पड़ता।
CCS ने फंसे भारतीयों की मदद के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार रात हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा के दौरान वहां बड़ी तादाद में रहने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी दिया है कि वे घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक एवं व्यवहार्य कदम उठाएं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि सीसीएस ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सीसीएस ने पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की।
ईरान-इजराइल में रहते हैं 50 हजार भारतीय
ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि इजराइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। वर्तमान में पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण उड़ान सेवाएं बाधित होने से सैकड़ों भारतीय दुबई, दोहा और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं, जिनमें से कई लोग सहायता के लिए सोशल मीडिया पर भारत सरकार से अपील कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में है और हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई हैं। बता दें कि भारत ने अतीत में संघर्षों के बीच पश्चिम एशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों भारतीयों को सफलतापूर्वक निकाला है।
सीसीएस देश के सुरक्षा संबंधी और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।
(भाषा के इनपुट के साथ)




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