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देश में पहली बार फ्लोटिंग जंक्शन, ‘तैरती’ नजर आएगी ट्रेन! जानिए कैसे करेगा काम

हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों के नीचे वैश्विक इंजीनियरिंग के मानकों को बदलने वाली है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे प्रोजेक्ट में  ‘फ्लोटिंग रेल टनल जंक्शन’ बनाया जाएगा, जो भारत में अपनी तरह का पहला जंक्शन होगा।

Sun, 12 April 2026 10:33 AMGaurav Kala अरविंद सिंह, नई दिल्ली
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देश में पहली बार फ्लोटिंग जंक्शन,  ‘तैरती’ नजर आएगी ट्रेन! जानिए कैसे करेगा काम

India First Floating Rail Junction: देश में पहली बार रेलवे प्रोजेक्ट के लिए फ्लोटिंग जंक्शन तैयार किया जा रहा है। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब इंजीनियरिंग के नए मानक गढ़ रही है। दुर्गम हिमालयी पहाड़ियों के नीचे बन रही यह रेल लाइन सिर्फ कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के कारण वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है। इस खास तकनीक के तहत आपको ट्रेन हिमालयी पहाड़ियों पर 'फ्लोटिंग' यानी 'तैरती' दिखेंगी।

परियोजना के तहत ब्यासी-देवप्रयाग सेक्शन में देश का पहला ‘फ्लोटिंग रेल टनल जंक्शन’ बनाया जा रहा है। यह जंक्शन इसलिए खास है क्योंकि इसे पारंपरिक ठोस चट्टानों पर नहीं, बल्कि बेहद कमजोर और चूरे जैसी मिट्टी वाले क्षेत्र में तैयार किया जा रहा है।

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क्यों खास है यह फ्लोटिंग टनल जंक्शन?

परियोजना के उप महाप्रबंधक (डीजीएम) और सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ ओमप्रकाश मालगुड़ी के मुताबिक, आमतौर पर रेलवे टनल के अंदर जंक्शन मजबूत चट्टानों पर बनाए जाते हैं। लेकिन इस रूट पर मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) का ऐसा जोन मिला है, जहां जमीन बेहद कमजोर है। ऐसे में यहां ‘डबल-आर्क सिस्मिक आइसोलेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भारत में पहली बार लागू हो रही है। इस तकनीक की मदद से टनल जंक्शन 'फ्लोट' यानी लचीले ढांचे की तरह व्यवहार करेगा, जिससे भूकंपीय जोखिम कम होगा।

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भूकंप में भी सुरक्षित रहेगी सुरंग

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी भूकंप-रोधी डिजाइन है। टनल को इस तरह बनाया जा रहा है कि वह शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करे। भूकंप आने पर सुरंग हल्की सी खिसककर फिर अपनी जगह पर लौट आएगी। इससे संरचना को गंभीर नुकसान होने की संभावना बेहद कम हो जाएगी

मिलीमीटर बदलाव पर भी अलर्ट

सुरक्षा के लिहाज से सुरंग में रॉक मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। टनल की दीवार में अगर 1 मिलीमीटर का भी बदलाव होता है तो तुरंत ऋषिकेश स्थित कंट्रोल रूम में अलार्म बज जाएगा। इससे किसी भी खतरे को समय रहते पहचानकर कार्रवाई की जा सकेगी।

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यात्रियों के कानों की भी होगी सुरक्षा

तेज रफ्तार ट्रेनों में टनल के अंदर हवा का दबाव अचानक बढ़ जाता है, जिससे यात्रियों को असहजता हो सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए एयर कुशन तकनीक लगाई जा रही है। यह तकनीक स्विट्जरलैंड की मशहूर गोथर्ड बेस टनल से प्रेरित है। इससे ट्रेन के गुजरने पर बनने वाले वायु दबाव को नियंत्रित किया जाएगा।

विकास की लाइफलाइन

करीब 125 किलोमीटर लंबी यह रेल परियोजना चारधाम यात्रा और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। यात्रा समय में भारी कमी आएगी। पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेज होंगे। स्विट्जरलैंड की गोथर्ड बेस टनल की तरह यहां लगे एयर कुशन ट्रेन की गति से बनने वाले वायु दबाव से यात्रियों के कानों की सुरक्षा करेंगे।

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