If A Politician Kid Can Become Politician, Justice Sharma Raps Kejriwal For Mentioning Her Children अगर नेता का बेटा नेता बन सकता है…, जस्टिस शर्मा ने अपने बच्चों के जिक्र पर केजरीवाल को फटकारा, Ncr Hindi News - Hindustan
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अगर नेता का बेटा नेता बन सकता है…, जस्टिस शर्मा ने अपने बच्चों के जिक्र पर केजरीवाल को फटकारा

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में फैसला सुनाते हुए, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने उनके परिवार के बारे में की गई टिप्पणियों पर केजरीवाल को फटकार लगाई।

Mon, 20 April 2026 07:13 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अगर नेता का बेटा नेता बन सकता है…, जस्टिस शर्मा ने अपने बच्चों के जिक्र पर केजरीवाल को फटकारा

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में फैसला सुनाते हुए, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने उनके परिवार के बारे में की गई टिप्पणियों पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फटकार लगाई। उन्होंने कहा- “अगर एक नेता की पत्नी पॉलिटिशियन बन सकती है, अगर एक नेता के बच्चे नेता बन सकते हैं। तो यह कैसे कहा जा सकता है कि एक जज के बच्चे लॉ के प्रोफेशन में नहीं आ सकते?" इस तरह केजरीवाल पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जस्टिस शर्मा ने न्यायपालिका की आजादी और निजी मामलों को कोर्ट की कार्रवाई से बाहर रखने की जरूरत पर जोर दिया।

केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के बच्चों पर क्या कहा?

दरअसल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने याचिका दायर कर जस्टिस शर्मा से इस केस में हटने की अपील की थी, जिसकी बीते दिनों से लगातार सुनवाई हो रही है। केजरीवाल ने सुनवाई के दौरान ''हितों के सीधे टकराव'' और "जस्टिस के मिसकेरेज" होने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल वकील हैं। उन्हें सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम मिलता है और इस मामले में सॉलिसिटर जनरल सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं।

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अगर नेता का बेटा नेता बन सकता है…,

इन चिंताओं का जवाब देते हुए, कोर्ट ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों और इस केस के बीच कोई लिंक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उनका कोई भी रिश्तेदार उनकी कोर्ट में पेश नहीं हुआ था या दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़े मामलों से जुड़ा नहीं था। अपनी बात रखते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा, “अगर एक नेता की पत्नी पॉलिटिशियन बन सकती है, अगर एक नेता के बच्चे नेता बन सकते हैं। तो यह कैसे कहा जा सकता है कि एक जज के बच्चे लॉ के प्रोफेशन में नहीं आ सकते? इसका मतलब होगा जजों के परिवार के फंडामेंटल राइट्स छीनना।”

मुकदमा लड़ने वाला यह सवाल नहीं कर सकता…

जस्टिस शर्मा ने यह भी साफ किया कि कोई लिटिगेंट यानी मुकदमा लड़ने वाला व्यक्ति, यह सवाल नहीं कर सकता कि जज का परिवार कैसे जीना चाहता है। आरोपों पर, कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावों के साथ साफ सबूत होने चाहिए। “जब तक इस बात का कोई सबूत न हो कि जज के बच्चों ने कोर्ट के ऑफिस का गलत इस्तेमाल किया है, ऐसे आरोप के बारे में जरा भी नहीं कहा जा सकता।”

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बेटे के सॉलिसिटर जनरल से जुड़े होने पर क्या कहा

बेटे के सॉलिसिटर जनरल से जुड़े होने के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, ऐसे प्रोफेशनल लिंक का मतलब अपने आप कोई झगड़ा नहीं होता, जब तक कि केस से सीधा कनेक्शन न दिखाया जाए। शर्मा ने कहा कि अगर किसी जज के रिश्तेदार किसी सरकारी पैनल में हैं, तो लिटिगेंट को यह बताना होगा कि यह मौजूदा केस या फैसले लेने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

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