जस्टिस स्वर्ण कांता ने केजरीवाल विवाद के बीच इस मामले से खुद को किया अलग, अब दूसरी बेंच करेगी सुनवाई
यह मामला कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान द्वारा संचालित एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है। सत्र अदालत ने 15 जनवरी 2024 को बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने के पर्याप्त सबूत हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह याचिका महाराष्ट्र संगठित अपराधि नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज एक मामले में दायर की गई थी। यह मामला कथित संगठित अपराध से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने बिना कोई कारण बताए मामले से स्वयं को अलग किया है। अब यह याचिका 23 अप्रैल को किसी अन्य न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी। इससे पहले जनवरी में एक समन्वय पीठ ने बाल्यान को कस्टडी पैरोल देने से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी पत्नी का मार्गदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। वर्तमान में बाल्यान मंडोली जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
यह मामला कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान द्वारा संचालित एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है। सत्र अदालत ने 15 जनवरी 2024 को बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि उनके खिलाफ संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने के पर्याप्त सबूत हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि बाल्यान समूह के सदस्य के रूप में लगातार अवैध गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने सांगवान गिरोह के सदस्यों के खिलाफ 16 प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिनमें जबरन वसूली, हिंसा व अन्य आपराधिक गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि बाल्यान इस संगठित अपराध सिंडिकेट में सुविधादाता की भूमिका निभा रहे थे।
आपको बता दें कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को सुनवाई से हटाने की मांग की है।
4 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था
बालियान और अन्य लोगों पर फरार गैंगेस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा कथित तौर पर चलाए जा रहे एक संगठित अपराध गिरोह से जुड़े मामले में आरोपपत्र दायर किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने बालियान के खिलाफ मकोका की धारा 3 और 4 के तहत सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हुई है। बालियान को 4 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिल गई थी
गौरतलब है कि बालियान को इससे पहले 4 दिसंबर, 2025 को जबरन वसूली के एक मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन उसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें मकोका मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था।
दिल्ली पुलिस को लगाई थी फटकार
जस्टिस शर्मा ने 13 मार्च को इस मामले की जांच में देरी को लेकर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि पुलिस को इस मामले की जांच तेजी से पूरी करनी चाहिए थी, क्योंकि आरोपी साल 2024 से ही जेल में बंद है। कोर्ट ने जांच की लंबी अवधि पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर यह कब तक जारी रहेगी? कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि जांच इसी तरह खिंचती रही, तो आरोपों पर सुनवाई कब शुरू होगी।
क्या है मकोका एक्ट?
मकोका एक्ट महाराष्ट्र सरकार ने साल 1999 में बनाया था। इसका पूरा नाम 'महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट' है। मकोका का मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध को खत्म करना है। यह कानून महाराष्ट्र के साथ-साथ दिल्ली में भी लागू है। यह कानून संगठित अपराध, अंडरवर्ल्ड और रंगदारी जैसे अवैध वित्तीय लाभ वाले अपराधों पर लागू होता है। मकोका लगने के बाद अपराधी की राह मुश्किल हो जाती है, क्योंकि इसमें जमानत के प्रावधान बेहद सख्त हैं।
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