Identity card and Aadhaar card are not required for admission in government schools in Faridabad district फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए पहचान-पत्र और आधार कार्ड जरूरी नहीं, आदेश जारी, Ncr Hindi News - Hindustan
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फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए पहचान-पत्र और आधार कार्ड जरूरी नहीं, आदेश जारी

फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए पहचान पत्र या आधार कार्ड का होना आवश्यक नहीं है। स्कूलों को बिना परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) व आधार कार्ड दाखिला देना होगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

Wed, 8 April 2026 06:55 AMSubodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए पहचान-पत्र और आधार कार्ड जरूरी नहीं, आदेश जारी

फरीदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए पहचान पत्र या आधार कार्ड का होना आवश्यक नहीं है। स्कूलों को बिना परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) व आधार कार्ड दाखिला देना होगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी स्कूलों के अध्यापकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों की कमी के आधार पर प्रवेश से वंचित न किया जाए। ऐसे बच्चों को अस्थायी दाखिला देने के आदेश दिए गए हैं।

बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर परिवार रहते हैं

यह निर्णय फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहर के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर परिवार रहते हैं। इन परिवारों के बच्चों के पास अक्सर हरियाणा का परिवार पहचान पत्र एवं आधार कार्ड नहीं होता, जिससे उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।

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एमआईएस पर अस्थायी प्रवेश आईडी बनाएं

निर्देशानुसार जिन बच्चों के पास परिवार पहचान पत्र नहीं है, उन्हें भी स्कूलों में प्रवेश दिया जाए। स्कूल स्टाफ अपनी एमआईएस कर्मचारी आईडी का उपयोग करते हुए इन बच्चों के लिए अस्थायी प्रवेश आईडी तैयार करेगा।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बसंत कुमार ढिल्लन ने कहा कि फरीदाबाद एक औद्योगिक इकाई है। यहां पर मजदूर तबके के लोग अधिक रहते हैं। ऐसे अभिभावकों को राहत देने के और बच्चों को स्कूल तक लाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। पहचान पत्र बनने के बाद उन्हीं बच्चों का दाखिला स्थायी कर दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रॉप आउट को शून्य करना है।

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम का हवाला दिया

मौलिक शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। ऐसे में किसी भी बच्चे को केवल दस्तावेजों की कमी के आधार पर प्रवेश से वंचित करना कानून के खिलाफ है।

विभाग ने कहा कि वे अपने निकटवर्ती क्षेत्र के बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करें। साथ ही परिवार पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र या अन्य कोई भी दस्तावेज दाखिला न देने का आधार नहीं बन सकता।

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