निजी स्कूलों के फीस मामले में दिल्ली सरकार को झटका, HC ने अधिसूचना पर रोक लगाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को एसएलएफआरसी गठित करने के दिल्ली सरकार के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही शुल्क वसूलने के हकदार होंगे जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूले थे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को एसएलएफआरसी गठित करने के दिल्ली सरकार के अध्यादेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही शुल्क वसूलने के हकदार होंगे जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूले थे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार को आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूलों को 'स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति' (एसएलएफआरसी) गठित करने के दिल्ली सरकार के आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दिया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान एसएलएफआरसी का गठन स्थगित रहेगा।
पीठ ने कहा कि स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए वही शुल्क वसूलने के हकदार होंगे जो उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में वसूले थे। पीठ ने आगे कहा कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस को कानून के अनुसार विनियमित किया जाएगा।
पीठ ने यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर पारित किया। इन याचिकाओं में दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसमें स्कूलों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी (स्कूल लीडरशिप कमेटी) गठित करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी, एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स, फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स, फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजुकेशन फॉर ऑल, रोहिणी एजुकेशनल सोसाइटी और एसोसिएशन ऑफ पब्लिक स्कूल्स शामिल हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान एसएलएफआरसी के गठन को स्थगित करना उचित होगा, क्योंकि इस पर अंतिम निर्णय 12 मार्च 2026 को होगा।
स्कूलों ने दावा किया कि अधिसूचना कानूनी रूप से मान्य नहीं है क्योंकि इसने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में एसएलएफआरसी के गठन के लिए निर्धारित समयसीमा को बदल दिया है।
हालांकि, सरकार ने तर्क दिया कि अधिनियम में दी गई तिथियां न तो बेहद महत्वपूर्ण हैं और न ही इसकी बुनियादी संरचना का हिस्सा हैं। इसलिए एक विशेष एकमुश्त उपाय के रूप में ऐसी समयसीमा में मामूली फेरबदल मान्य होगा। सरकार ने दावा किया कि इस अधिनियम का उद्देश्य स्कूलों द्वारा व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना है और इस अधिसूचना से स्कूलों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए शुल्क निर्धारण कानून पर सवाल उठाए जाने के बाद सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के कार्यान्वयन को सुचारू बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की।
अधिसूचना के अनुसार, सभी स्कूल को आदेश प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर विद्यालय स्तरीय शुल्क विनियमन समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया था। इसमें कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन को 2026-27 से शुरू होने वाले अगले तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए प्रस्तावित शुल्क संरचना का विवरण विद्यालय स्तरीय शुल्क विनियमन समिति के गठन के 14 दिनों के भीतर पेश करना होगा। इसके बाद समिति अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शुल्क निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।




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