पार्षदों को हाई-टेक बनाने की तैयारी, गुरुग्राम नगर निगम 80 हजार का मोबाइल फोन देगा
गुरुग्राम नगर निगम अपने पार्षदों को हाई-टेक बनाने की तैयारी में है। निगम क्षेत्र के वार्डों में जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और पार्षदों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को महंगे स्मार्टफोन और सरकारी सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए 32 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

गुरुग्राम नगर निगम अपने पार्षदों को हाई-टेक बनाने की तैयारी में है। निगम क्षेत्र के वार्डों में जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और पार्षदों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को महंगे स्मार्टफोन और सरकारी सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस परियोजना के लिए नगर निगम ने आधिकारिक तौर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और करीब 32 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। नगर निगम द्वारा जारी एस्टीमेट के अनुसार, प्रत्येक पार्षद को करीब 80 हजार रुपये की कीमत वाला प्रीमियम स्मार्टफोन दिया जाएगा।
इसके लिए निगम ने विशेष रूप से वन-प्लस कंपनी के 40 मोबाइल फोन खरीदने का टेंडर लगाया है। इन 40 फोन में निर्वाचित 36 पार्षदों के अलावा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और तीन मनोनीत पार्षदों को शामिल किया गया है। निगम का मानना है कि प्रीमियम फोन होने से फाइल वर्क, फोटोग्राफी और विभिन्न सरकारी ऐप्स के संचालन में आसानी होगी।
सरकारी नंबर पर दर्ज होंगी वार्ड की शिकायतें
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सरकारी सिम कार्ड है। मोबाइल फोन के साथ निगम पार्षदों को सरकारी मोबाइल नंबर भी आवंटित करेगा। यह नंबर सार्वजनिक किया जाएगा ताकि वार्ड के लोग सीधे अपने पार्षद से संपर्क कर सकें। सरकारी नंबर होने से शिकायतों का रिकॉर्ड रखना आसान होगा और अधिकारियों व पार्षदों के बीच समन्वय बेहतर हो सकेगा। अक्सर शिकायत रहती है कि पार्षदों के निजी नंबर व्यस्त रहते हैं , सरकारी नंबर इस समस्या को हल करेगा।
संबंधित वार्डों में कार्यालय की सुविधा
नगर निगम गुरुग्राम सभी पार्षदों को उनके संबंधित वार्डों में कार्यालय की सुविधा भी उपलब्ध करवा दी है। जिन पार्षदों के पास कार्यालय के लिए जगह नहीं थी, वहां निगम द्वारा सामुदायिक भवन या अन्य सरकारी जगहों पर वार्ड पार्षद कार्यालय बनाए जा चुके हैं। निगम आयुक्त प्रदीप दहिया का कहना है कि निगम पार्षदों को निगम की तरफ से मोबाइल फोन उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसको लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। पेपरलेस वर्किंग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
विरोध और चर्चा का विषय
80 हजार रुपये के महंगे फोन खरीदने के फैसले ने शहर में नई चर्चा छेड़ दी है। एक ओर जहां निगम के पास सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों के लिए फंड की कमी की बातें सामने आती रहती हैं, वहीं पार्षदों पर लाखों रुपये के मोबाइल खर्च करने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। वहीं, निगम अधिकारियों का तर्क है कि डिजिटल इंडिया और पेपरलेस वर्किंग को बढ़ावा देने के लिए यह एक आवश्यक कदम है।




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