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गुरुग्राम में हर सड़क-नाले और सीवर लाइन की डिजिटल आईडी बनी, क्या होंगे इसके फायदे

गुरुग्राम नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) में विकास कार्यों के नाम पर होने वाली गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रशासन ने नया कदम उठाया है। इसके लिए डिजिटल आईडी बनाई गई है।  

Mon, 26 Jan 2026 03:03 PMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गुरुग्राम, कृष्ण कुमार
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गुरुग्राम में हर सड़क-नाले और सीवर लाइन की डिजिटल आईडी बनी, क्या होंगे इसके फायदे

गुरुग्राम नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) में विकास कार्यों के नाम पर होने वाली गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रशासन ने नया कदम उठाया है। इसके लिए डिजिटल आईडी बनाई गई है। अब शहर की किसी भी सड़क, बरसाती नाले, सीवर लाइन या बूस्टिंग स्टेशन का टेंडर दोबारा नहीं लगाया जा सकेगा, जब तक कि उसकी निर्धारित अवधि पूरी न हो जाए।

निगम ने पारदर्शिता लाने के लिए शहर के हर बुनियादी ढांचे को एक अलग यूनिक आईडी आवंटित की है। इस नई प्रणाली के लागू होने से न केवल करोड़ों रुपये के राजस्व की बचत होगी, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत पर भी अंकुश लगेगा।

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शहर की सभी संपत्तियों और बुनियादी ढांचे का डिजिटल मैप तैयार

निगम की इस योजना के केंद्र में जीआईएस लैब और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक है। निगम ने शहर की सभी संपत्तियों और बुनियादी ढांचे का डिजिटल मानचित्र तैयार किया है। जब भी किसी नई सड़क या नाले के निर्माण की योजना बनेगी, तो एआई की मदद से उसकी आईडी अनलॉक करनी होगी। इस आईडी में उस बुनियादी ढांचे का पूरा इतिहास दर्ज होगा, जैसे कि सड़क पिछली बार कब बनी थी, उसकी मरम्मत कब हुई थी।

ऐसे रुकेगी लापरवाही

यदि कोई सड़क या सीवर लाइन अपनी गारंटी अवधि से पहले खराब होती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी की सुरक्षा राशि तुरंत जब्त कर ली जाएगी। आमतौर पर तारकोल की सड़क की उम्र तीन साल और आरसीसी की सड़क की उम्र करीब 30 साल मानी जाती है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से निर्माण में खामी का पता चल जाएगा।

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लैब में आईडी मार्क होगी

अब नगर निगम में किसी भी प्रकार के एस्टीमेट बनाने से पहले उस सड़क, नाले, सीवर लाइन, बूस्टिंग स्टेशन, पार्क आदि की जीआईएस लैब में जाकर उसकी आईडी मार्क करनी होगी। एक बार आईडी मार्क होने के बाद वह अपने आप लॉक जाएगी। इसके बाद यह एस्टीमेट निगम के उच्च अधिकारियों के पास जाएगा।

बिना जांच के करोड़ों खर्च कर पार्क विकसित किया

नगर निगम की लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण सेक्टर-9 में देखने को मिला। यहां निगम ने जमीन के स्वामित्व की जांच किए बिना ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की करीब ढाई एकड़ जमीन पर भव्य पार्क विकसित कर दिया। इस पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए। पार्क बनने के बाद जब एचएसवीपी को पता चला, तो उसने निगम को नोटिस थमा दिया और दो माह पहले वहां तोड़फोड़ भी की।

दूसरे विभाग की सड़क का निर्माण खुद करा दिया

साल 2020 में नगर निगम के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की एक सड़क का निर्माण खुद ही करा दिया। जबकि नियमों के अनुसार इसकी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की थी। निगम ने बिना अधिकार क्षेत्र की जांच किए करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इस मामले में भी जांच तक नहीं की गई कि आखिर किसके आदेश पर दूसरे विभाग की संपत्ति पर निगम का पैसा खर्च किया गया।

प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम, ''दोहरे टेंडर प्रक्रिया पर लगाम लगाने को निगम ने सामुदायिक भवन, पार्क, सड़क, बरसाती नाला, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट को अलग-अलग यूनिक आईडी दी है। आईडी के साथ निगम के माइक्रो डेटा सेंटर में सभी का पूरा डेटा होगा।''

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