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एनजीटी के आदेशों की धज्जियां; 'जहरीली' हो रही गुरुग्राम नहर, क्या वजह?

गुरुग्राम नहर के जहरीली होने का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही से नहर का पानी जहरीला हो रहा है जिससे आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

Tue, 10 March 2026 02:22 PMKrishna Bihari Singh हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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एनजीटी के आदेशों की धज्जियां; 'जहरीली' हो रही गुरुग्राम नहर, क्या वजह?

फरीदाबाद के गौंछी नाले का गंदा और बिना शोधित पानी सीधे गुरुग्राम नहर में छोड़ा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह एनजीटी के नियमों का खुला उल्लंघन है। आलम यह कि इस पलूशन के कारण नहर का पानी और भूजल जहरीला होने का जोखिम है जिससे फसलों की सिंचाई के माध्यम से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने इस पानी को ट्रीट करने के लिए एसटीपी की योजना बनाई थी लेकिन सुस्ती के कारण वह पूरी नहीं हुई।

बिना शोधित किए गुरुग्राम नहर में छोड़ा जा रहा पानी

फरीदाबाद शहर में गौंछी नाले का पानी बिना शोधित किए गुरुग्राम नहर में छोड़ा जा रहा है, जिससे न केवल नहर का पानी और भूजल दूषित हो रहा है, बल्कि सिंचाई में इस्तेमाल होने से बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है।

सिंचाई विभाग ने भी साधी चुप्पी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उन्हें डर है कि इससे पलवल के गांव छांयसा जैसा मामला यहां भी हो सकता है। गुरुग्राम में करीब 10 किलोमीटर लंबा गौंछी नाला बहता है। वर्षों पहले इस नाले का निर्माण बरसाती पानी निकासी की उचित व्यवस्था के लिए किया गया था।

गुरुग्राम नहर में छोड़ा जा रहा दूषित पानी

इसमें सेक्टर और कॉलोनियों की सीवर लाइनों को जोड़ दिया गया। शहर में यह नाला सरूरपुर के समीप गांव प्रतापगढ़ से मादलपुर को जोड़ने वाली सड़क के साथ बने गुरुग्राम से शुरू होता है और बुढ़िया नाले में जुड़ता है। सरूरपुर के पास ही गुरुग्राम नहर में इसका पानी जा रहा है।

पानी को शोधित करने की योजना नहीं हुई साकार

हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने गौंछी नाले के पानी को शोधित करने के लिए इसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ने की एक विस्तृत योजना तैयार की थी। करोड़ों रुपये के बजट का अनुमान लगाया गया था, लेकिन धरातल पर एक ईंट भी नहीं लगी। अधिकारियों की सुस्ती के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी और अब हजारों गैलन दूषित पानी रोजाना नहर के स्वच्छ जल को जहरीला बना रहा है।

नियमों की अनदेखी

एनजीटी ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि किसी भी प्राकृतिक जल स्रोत या नहर में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज का पानी नहीं गिराया जा सकता है। गौंछी नाले के मामले में इन नियमों की अनदेखी हो रही हैं। पर्यावरण प्रेमी सुनील हर्षना ने कहा कि संबंधित विभाग केवल जुर्माना भरने या नोटिस तक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाया जा रहा।

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क्या बोले कार्यकारी अभिंयता?

एफएमडीए के कार्यकारी अभिंयता समुंदर सिंह ने कहा कि गौंछी नाले का पानी बिना शोधित किए गुरुग्राम नहर में छोड़े जाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। इसके आधार पर ही आगे की योजना बनेगी।

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आसपास के क्षेत्रों में खतरा

पलवल के छांयसा गांव पहले ही दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों का दंश झेल रहा है, अनेक लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि जल्द ही गौंछी नाले के पानी को नहर में गिरने से नहीं रोका गया, तो आसपास के दर्जनों गांवों में छांयसा जैसी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है।

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