गुरुग्राम की हवा पर रहेगी पैनी नजर, साल के अंत तक लगेंगे 5 नए मॉनिटरिंग स्टेशन; किन इलाकों को चुना गया?
कम लागत वाले मैन्युअल एयर क्वालिटी मॉनिटर्स लगाने की बात भी कही गई है। यह 'ग्रिड-आधारित' व्यवस्था का हिस्सा होगा, जिसमें पूरे शहर को बराबर हिस्सों (जोन) में बांटा जाएगा ताकि हर जगह की निगरानी एक समान तरीके से हो सके।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) राज्य भर में इस साल के अंत तक 23 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से पांच गुरुग्राम में लगेंगे। इससे हवा में प्रदूषण के स्तर में होने वाली अचानक बढ़त पर और मजबूती से नजर रखी जा सकेगी।
यह प्रस्ताव बुधवार को बोर्ड सदस्यों के साथ हुई बैठक के दौरान कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के समक्ष रखा गया। इसमें कम लागत वाले मैन्युअल एयर क्वालिटी मॉनिटर्स लगाने की बात कही गई है। यह 'ग्रिड-आधारित' व्यवस्था का हिस्सा होगा, जिसमें पूरे शहर को बराबर हिस्सों (जोन) में बांटा जाएगा ताकि हर जगह की हवा निगरानी एक समान तरीके से हो सके।
गुरुग्राम में कहां लगेंगे?
गुरुग्राम में इन मॉनिटर्स के लिए चुनी गई जगहों में बेहरामपुर (सेक्टर 71) और जहाजगढ़ (सेक्टर 106) के बाहरी इलाके शामिल हैं। इसके अलावा, रिहायशी इलाके और पार्क जैसे ताऊ देवीलाल पार्क (सेक्टर 22) और लेजर वैली पार्क (सेक्टर 29) के साथ-साथ गुरुग्राम-झज्जर बॉर्डर रोड पर चंदू गांव के पास बने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के आस-पास के इलाके भी इसमें शामिल हैं।
एयर क्वालिटी का एक सटीक डेटा मिलेगा
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, प्रस्ताव का मकसद घनी आबादी वाले क्षेत्रों और सेक्टर 22-29 जैसे इलाकों की निगरानी करना है, ताकि शहर की एयर क्वालिटी का एक सटीक डेटा तैयार किया जा सके।
पूरे गुरुग्राम में एक नेटवर्क बन जाएगा
एचएसपीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'सीएक्यूएम के नए फॉर्मूले के आधार पर, हर स्टेशन 25 वर्ग किलोमीटर का ग्रिड को कवर करेगा, जिससे पूरे गुरुग्राम में एक नेटवर्क बन जाएगा। पार्कों में लगाए जाने वाले स्टेशन सार्वजनिक जगहों और औद्योगिक इलाकों के पास की उन जगहों की निगरानी करेंगे जहां हवा के बहाव के साथ प्रदूषण जमा होता है। फिलहाल, गुरुग्राम में प्रदूषण मापने के चार मुख्य स्टेशन (सीएक्यूएम) हैं जिनमें तीन एचएसपीसीबी द्वारा सेक्टर 51, विकास सदन और टेरी ग्राम में चलाए जा रहे हैं, और एक ग्वालियर पहाड़ी (NISE) में मौसम विभाग द्वारा चलाया जा रहा है।
प्रस्ताव में कुछ बदलाव करने को कहा गया है
वहीं एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'सीएक्यूएम की उप-समिति ने इस प्रस्ताव की समीक्षा की है और कुछ बदलाव करने को कहा है। अगली बैठक में एक नया प्रस्ताव पेश किया जाएगा।'
आपको बता दें कि सीएक्यूएम के नए नियमों के अनुसार, मॉनिटर लगाने के लिए आबादी और जमीन (जैसे कि वह इलाका रिहायशी है, ट्रैफिक वाला है, औद्योगिक है या खाली मैदान है) आदि पर ध्यान देना जरूरी है।
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