ग्रेटर नोएडा के इस एरिया में 12 एकड़ में बन रहा घना जंगल, लगाए जा रहे 1 लाख पौधे; मिलेगी शुद्ध हवा
मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति के जरिए शहरों में कम समय में घने जंगल बनाए जा सकते हैं जबकि परंपरागत तरीके से काफी समय लग जाता है। मियावाकी पद्धति से कुछ ही साल में घना जंगल बसाया जा सकता है।

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी रायपुर बंगर गांव के पास 12 एकड़ में वन क्षेत्र विकसित करेगा। इसके लिए मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे पूरा वन क्षेत्र हर भरा रहेगा। अथॉरिटी सेक्टर XU-3 और ओमिक्रॉन-1 के बीच स्थित भूखंड पर इस वन क्षेत्र का निर्माण करेगी।
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक अथॉरिटी ने जानकारी दी है कि वन क्षेत्र को विकसित करने के लिए कम से कम 1 लाख पेड़ लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और कैच फाउंडेशन कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) प्रोगाम के जरिए मदद देंगे। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीलक्ष्मी वीएस ने शनिवार को कुछ पौधे लगातर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत भी कर दी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अथॉरिटी की ओर से जमीन मुहैया करवा दी गई है और प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुका है।
मियावाकी तकनीक का होगा इस्तेमाल
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीनियर मैनेजर (हॉर्टिकल्चर) अजीत पटेल ने जानकारी दी है कि इस इलाके में एक ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए रही है। यह प्रोजेक्ट 'मियावाकी' तकनीक पर आधारित होगा जो शहरों में घने देशी जंगल उगाने का एक खास तरीका है।
कैच फाउंडेशन अगले तीन सालों तक इन पौधों की देखभाल और निगरानी करेगा। इस दौरान पौधों की समय-समय पर सिंचाई, मिट्टी को उपजाऊ बनाना, पौधों की सेहत पर नजर रखना आदि शामिल है। यही नहीं इस दौरान खाली पड़ी जगहों पर नए पेड़ लगाने की भी जिम्मेदारी कैंच फाउंडेशन की ही है।
कम समय में विकसित होगा घना जंगल
अधिकारियों का कहना है कि मियावाकी वृक्षारोपण पद्धति के जरिए शहरों में कम समय में घने जंगल बनाए जा सकते हैं जबकि परंपरागत तरीके से काफी समय लग जाता है। मियावाकी पद्धति से कुछ ही साल में घना जंगल बसाया जा सकता है। इस तरह के जंगल हवा की गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता वापस लाने, शहरों की गर्मी कम करने और कार्बन सोखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2017 में सोरखा गांव में बनाया गया था जंगल
आपको बता दें कि नोएडा अथॉरिटी ने 2017 में सोरखा गांव में 15 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में एक शहरी वन का सफलतापूर्वक विकास किया था। आज यहां 62 से ज्यादा प्रजातियों के 88,442 पेड़ों का वन क्षेत्र है।
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