कब्जा करने वालों सावधान! ग्रेटर नोएडा में AI करेगा अवैध निर्माण की पहचान, अथॉरिटी को मिलेगा अलर्ट
अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है जमीन पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीक के जरिए अतिक्रमण को कंट्रोल किया जा सकता है ताकि पर्यावरण और शहरों की बनावट प्रभावित न हो।

ग्रेटर नोएडा में अतिक्रमण पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अतिक्रमण निगरानी प्रणाली के जरिए नजर रखी जाएगी। इसके लिए एक आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है जो कि एआई आधारित इंटीग्रेटेड हाई-रेजल्यूशन सेटेलाइट इमेरजरी के जरिए नजर रखेगा। इस सिस्टम को इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) का नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर (एनआरएससी) तैयार कर रहा है। इसके लिए ग्रेटर नोएडा डेवलेपमेंट अथॉरिटी ने गुरुवार को नई दिल्ली में एमओयू पर भी हस्ताक्षर कर लिए हैं। इसके जरिए जमीन की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन करना संभव होगा।
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक यह देश में अपने तरह की पहली अनूठी पहल है जिसके जरिए जमीनों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी। ग्रेटर नोएडा डेवलेपमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एनजी रवि कुमार ने कहा, ‘अतिक्रमण केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पर्यावरण और शहर की प्लानिंग पर भी पड़ता है। वैज्ञानिक निगरानी के जरिए इसपर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।’

पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही भी तय
कुमार ने आगे बताया कि ‘ये तकनीक के जरिए शासन चलाने की दिशा में एक अहम कदम है। इसरो जैसी संस्था की मदद से सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा तो होगी ही साथ ही पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही भी तय होगी।’
डेटा के जरिए अतिक्रमण को पहले ही रोक लिया जाएगा
वहीं इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमित यादव ने कहा है कि 'अतिक्रमण के बाद होने वाली समस्या के बजाय अब एआई और डेटा के जरिए अतिक्रमण को पहले ही रोक लिया जाएगा। इसरो का एनआरएससी इसके लिए एआई मॉडल, एक डिजिटल डैशबोर्ड और अलर्ट सिस्टम तैयार करेगा। इसके साथ ही एनआरएससी ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी देगा।'
अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है जमीन पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीक के जरिए अतिक्रमण को कंट्रोल किया जा सकता है ताकि पर्यावरण और शहरों की बनावट प्रभावित न हो।
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