कोरोना में गेम की लत, स्कूल तक छूटा; अकेलेपन ने गाजियाबाद की तीन बहनों को कैसे तोड़ दिया?
Ghaziabad Triple Suicide: गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड की घटना झकझोर कर देने वाली है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि कोरोना के समय गेमिंग की लत शुरू हुई। तीनों का स्कूल तक छूटा। अकेलेपन ने तीनों को तोड़ दिया था।

Ghaziabad Triple Suicide: बुधवार तड़के करीब 2:15 बजे गाजियाबाद के भारत सिटी अपार्टमेंट परिसर में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया। एक ही परिवार की तीन नाबालिग बहनों ने अपने नौवें माले के फ्लैट की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। तीनों बहनें जो नहाना, खाना, सोना सब साथ-साथ करती थीं, अंत में मौत भी साथ चुनी। जांच में सामने आया है कि कोरोना महामारी के वक्त उन्हें कोरियन गेम की लत लगी थी। उन्होंने स्कूल जाना तक छोड़ दिया था।
पुलिस के अनुसार, रात के सन्नाटे में तीनों बहनें अपने फ्लैट की बालकनी में गईं। बालकनी का दरवाज़ा अंदर से बंद किया गया और फिर एक-एक कर तीनों ने नीचे छलांग लगा दी। उनकी चीखों और जमीन पर गिरने की आवाज़ से माता-पिता, पड़ोसी और सोसायटी के सुरक्षा गार्ड जाग गए। जब तक परिजन बालकनी का दरवाज़ा तोड़कर बाहर पहुंचे, तीनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
पापा के नाम सुसाइड लेटर
एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया, “मौके पर पहुंचकर पुष्टि हुई कि चेतन कुमार की तीनों बेटियों की नौवीं मंज़िल से कूदने के कारण मौत हो चुकी है।” आत्महत्या से पहले तीनों बहनों ने एक हाथ से लिखा हुआ नोट छोड़ा। नोट में लिखा था- “सॉरी पापा” साथ में एक रोते हुए इमोजी का स्केच भी बनाया गया था। इसके अलावा पुलिस को मौके से आठ पन्नों का सुसाइड नोट और एक डायरी भी मिली है।
नोट में लिखा है, “इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है। अभी पढ़ो। मैं सच में बहुत सॉरी हूं। सॉरी पापा।”
कोरोना में लगी गेमिंग की लत, स्कूल छूटा
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनों की ऑनलाइन गेमिंग की लत कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई। लॉकडाउन के वक्त मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स उनकी दुनिया बन गए। धीरे-धीरे वे स्कूल में अनियमित होने लगीं और हालात यहां तक पहुंच गए कि पिछले दो साल से तीनों ने स्कूल जाना पूरी तरह छोड़ दिया था। डायरी में उनकी मोबाइल और गेमिंग गतिविधियों, खासकर कोरियन टास्क-आधारित ऑनलाइन गेम्स का विस्तार से ज़िक्र मिला है।
‘कोरिया ही हमारी दुनिया है’
मृतक बहनों के पिता चेतन कुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटियां कोरियन संस्कृति, गेम्स और ऑनलाइन कंटेंट से गहराई से प्रभावित थीं। उन्होंने अपने लिए कोरियन नाम तक रख लिए थे। पिता के मुताबिक, “वे कहती थीं- पापा, सॉरी… कोरिया ही हमारी ज़िंदगी है, कोरिया ही हमारा सबसे बड़ा प्यार है। हम इसे छोड़ नहीं सकते।” परिवार ने हाल ही में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी, जिसके बाद बच्चियां मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगी थीं।
दीवारों पर लिखा अकेलापन
पुलिस जब बच्चियों के कमरे में पहुंची, तो दीवारों पर कुछ भावनात्मक पंक्तियां लिखी मिलीं, जो उनके मानसिक हालात को बयान करती हैं। इनमें “I am very very alone” और “make me a hert of broken (sic)” जैसे वाक्य लिखे हुए पाए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी निमिष पटेल ने कहा, “फिलहाल किसी खास गेम का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि बच्चियां कोरियन संस्कृति और ऑनलाइन कंटेंट से प्रभावित थीं। मोबाइल फोन से दूरी बनाए जाने का उन पर गहरा असर पड़ा।” पुलिस सुसाइड नोट, डायरी और पारिवारिक हालात के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।




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