नहाना, खाना, सोना और अब मौत भी एक साथ... क्या गाजियाबाद की 3 बहनों की 'अजीब आदत' बन गई काल?
गाजियाबाद की तीन बहनों की आत्महत्या के पीछे 'एक साथ जीने-मरने' की खतरनाक मानसिक निर्भरता सामने आई है। बाहरी दुनिया से कटी ये बहनें कोरियन गेम की लत और एक-दूसरे पर अत्यधिक निर्भरता के कारण मौत के गले लग गईं।

भाई-बहनों में प्यार होना आम बात है, लेकिन गाजियाबाद की भारत सिटी टाउनशिप में जो हुआ, उसने इस प्यार की परिभाषा को एक खौफनाक रूप दे दिया है। 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली बहनों की मौत सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि 'एक साथ जीने और एक साथ मरने' की एक खतरनाक जिद जैसी लग रही है। पुलिस की तफ्तीश में इन बहनों की दिनचर्या को लेकर जो खुलासा हुआ है, वह किसी को भी सिहरन पैदा कर सकता है।
वो आदत: एक ही साये में तीन जिंदगियां
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें सामान्य बच्चों की तरह नहीं रहती थीं। वे एक-दूसरे पर मानसिक रूप से इस कदर निर्भर थीं कि उनका नहाना, खाना, सोना और यहां तक कि दिनचर्या के छोटे-मोटे काम भी एक साथ ही होते थे।
मनोवैज्ञानिक इसे 'शेयर्ड डिल्यूजन' या अत्यधिक निर्भरता मानते हैं, जहां व्यक्ति अपनी खुद की पहचान खो देता है। कोरोना काल के बाद से वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट चुकी थीं। आलम यह था कि सबसे बड़ी बहन 16 साल की होने के बावजूद अभी भी कक्षा 4 की छात्रा थी। उनकी दुनिया सिर्फ एक-दूसरे तक और मोबाइल स्क्रीन तक सिमट कर रह गई थी।

'कोरियन लव गेम' और मौत का समझौता!
यह 'साथ रहने' की लत ही थी जिसने उन्हें मौत के दरवाजे तक भी एक साथ पहुंचाया। वे कथित तौर पर एक 'कोरियन लव गेमिंग ऐप' खेल रही थीं, जो एक टास्क-बेस्ड गेम है।
जब माता-पिता ने उन्हें गेम खेलने से रोका, तो तीनों ने नहीं माना। रिपोर्ट्स इशारा करती हैं कि चूंकि वे हर फैसला साथ लेती थीं, इसलिए आत्महत्या जैसा भयानक फैसला भी सामूहिक रूप से लिया गया। उनकी 'अजीब आदत' ने किसी एक बहन को भी यह सोचने का मौका नहीं दिया कि वे क्या करने जा रही हैं।
मंदिर वाला कमरा और रात के 2 बजे
बुधवार तड़के 2 बजे, जब पूरा शहर शांत था, तीनों ने अपने फ्लैट के मंदिर वाले कमरे को चुना। वहां खिड़की अक्सर खुली रहती थी। उन्होंने वहां एक कुर्सी लगाई और एक-दूसरे का हाथ थामने की कसम को निभाते हुए, एक-एक करके नीचे कूद गईं।
मौके से पुलिस को कुछ हाथ से लिखे नोट मिले हैं, जो शायद उस गेम के टास्क या उनके आपसी समझौते की आखिरी निशानी हैं। यह घटना बताती है कि जब सिबलिंग बॉन्डिंग बाहरी दुनिया से कटकर एक 'बंद कमरे' की मानसिकता में बदल जाए, तो वह कितनी जानलेवा हो सकती है।
आत्महत्या पर चर्चा करना कुछ लोगों के लिए भावनात्मक रूप से कठिन या ट्रिगरिंग हो सकता है। हालांकि, आत्महत्या रोकी जा सकती है। भारत में आत्महत्या रोकथाम के लिए कुछ प्रमुख हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं: सुमैत्री (दिल्ली स्थित): 011-23389090, स्नेहा फाउंडेशन (चेन्नई स्थित): 044-24640050। जरूरत पड़ने पर इन हेल्पलाइन से तुरंत संपर्क करें।




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