कोरियन गेम के टास्क में गाजियाबाद की 3 बहनों ने दी जान, 'ब्लू व्हेल' जैसी खौफनाक यादें ताजा
गाजियाबाद के लोनी में 'कोरियन लवर गेम' के प्रभाव में आकर तीन सगी बहनों ने बहुमंजिला इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस और साइबर सेल अब इस गेम के 'डेथ टास्क' और एडमिन की जांच कर रहे हैं।

यूपी के गाजियाबाद से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां तीन सगी बहनों ने एक खतरनाक ऑनलाइन गेम के प्रभाव में आकर अपनी जान ले ली। शुरुआती जांच और परिजनों के बयानों के आधार पर इस मामले के तार एक 'कोरियन गेम' से जुड़ते दिख रहे हैं, जिसने कुछ साल पहले आतंक मचाने वाले 'ब्लू व्हेल चैलेंज' की यादें ताजा कर दी हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद के लोनी इलाके में रहने वाली तीन बहनों ने एक ही रात में आत्महत्या कर ली। ये तीनों भारत सिटी सोसाइटी के बी-1 टावर, फ्लैट 907 में रहती थीं। तीनों बहनें एक-एककर 9वीं मंजिल से नीचे कूद गईं। घर से मिले कुछ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मोबाइल सर्च हिस्ट्री से पता चला है कि तीनों बहनें पिछले काफी समय से एक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थीं।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, तीनों बहनें पिछले कोरोना काल से एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम 'कोरियन लवर गेम' की लत में फंसी हुई थीं। परिवार ने बताया कि गेम खेलने की वजह से उनकी पढ़ाई और सेहत पर असर पड़ रहा था, इसलिए उन्हें बार-बार मना किया जाता था। लेकिन वे नहीं मानीं।

व्यवहार में बदलाव
परिजनों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से तीनों बहनों ने खुद को कमरे में बंद करना शुरू कर दिया था और वे घंटों तक फोन पर समय बिताती थीं। वे गेम के बारे में किसी से बात नहीं करती थीं और अक्सर रात-रात भर जागती रहती थीं।
ब्लू व्हेल चैलेंज की याद क्यों ताजा हुई?
यह घटना 2016-17 में चर्चित 'ब्लू व्हेल चैलेंज' की याद दिला रही है। ब्लू व्हेल एक कथित ऑनलाइन चैलेंज था, जिसमें एडमिन द्वारा 50 दिनों में 50 टास्क दिए जाते थे – शुरुआत में सामान्य काम, लेकिन अंत में आत्महत्या तक पहुंचना। भारत सहित कई देशों में इससे जुड़े कई मामलों की रिपोर्ट आई थी, हालांकि कई जांचों में इसे अफवाह या अलग-अलग कारणों से जोड़ा गया। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ये गेम 'डार्क साइकोलॉजी' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे किशोर आसानी से इनके जाल में फंस जाते हैं।
यहां भी पुलिस जांच कर रही है कि क्या 'कोरियन लवर गेम' में कोई ऐसा टास्क-बेस्ड मैकेनिज्म था, जो ब्लू व्हेल या मोमो चैलेंज जैसी जानलेवा चुनौतियों की तरह युवाओं को प्रभावित करता हो। फिलहाल आत्महत्या का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन गेमिंग लत और परिवार में मना करने पर तनाव मुख्य संदेह के केंद्र में हैं।

पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। साइबर एक्सपर्ट्स उस विशिष्ट ऐप या लिंक की तलाश कर रहे हैं जिसके जरिए यह गेम खेला जा रहा था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या कोई बाहरी व्यक्ति 'एडमिन' बनकर उन्हें निर्देश दे रहा था।
पैरेंट्स को बहुत ध्यान देने की जरूरत
अगर आपके घर में बच्चे या किशोर अचानक चुपचाप रहने लगें, सोशल मीडिया पर रहस्यमयी बातें करें या अपनी नींद और खान-पान का तरीका बदल लें, तो यह डिजिटल खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे में पैरेंट्स बच्चों के साथ समय बिताएं और उनके ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखें। उनसे खुलकर बात करें ताकि वे किसी भी दबाव या धमकी को आपसे साझा कर सकें।
आत्महत्या पर चर्चा करना कुछ लोगों के लिए भावनात्मक रूप से कठिन या ट्रिगरिंग हो सकता है। हालांकि, आत्महत्या रोकी जा सकती है। भारत में आत्महत्या रोकथाम के लिए कुछ प्रमुख हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं: सुमैत्री (दिल्ली स्थित): 011-23389090, स्नेहा फाउंडेशन (चेन्नई स्थित): 044-24640050। जरूरत पड़ने पर इन हेल्पलाइन से तुरंत संपर्क करें।




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