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फर्जी आधार कार्ड बनाने वाल 2 सगे भाई गिरफ्तार, डाक विभाग की महिला कर्मचारी फर्जीवाड़े में भी शामिल

गाजियाबाद की साइबर थाना पुलिस ने जनसेवा केंद्र चलाने वाले हापुड़ के दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। जनसेवा केंद्र की आड़ में दोनों भाई फर्जी आधार कार्ड और एमसीडी का जन्म प्रमाणपत्र बनाने का काम भी करते थे। इस गैंग में डाक विभाग की एक महिला कर्मचारी भी शामिल है। 

Mon, 18 May 2026 07:49 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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फर्जी आधार कार्ड बनाने वाल 2 सगे भाई गिरफ्तार, डाक विभाग की महिला कर्मचारी फर्जीवाड़े में भी शामिल

फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गैंग का पर्दाफाश करते हुए गाजियाबाद की साइबर थाना पुलिस ने हापुड़ के दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। डाक विभाग की एक महिला कर्मचारी भी इस गैंग में शामिल है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिये बदलाव कर नया आधार कार्ड बनाने का काम रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए थाना धौलाना जिला हापुड़ के गांव हसनपुर लौढ़ा निवासी दीपक कुमार और उसके सगे भाई विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

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दोनों आरोपी पंचवटी तिराहे के पास थापर बिल्डिंग में बालाजी जनसेवा केंद्र चला रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके जनसेवा केंद्र पर आधार कार्ड में संशोधन कराने वाले लोगों से वह मोटी रकम वसूलते थे। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के नाम, जन्मतिथि या पते में बदलाव कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। आरोपी दिल्ली नगर निगम (MCD) के जन्म प्रमाण-पत्रों की हूबहू कॉपी बनाते थे। इसके अलावा एलपीजी एजेंसियों के दस्तावेज और सेना के रिटायर्ड कर्मचारियों को जारी होने वाले पेंशन भुगतान आदेश भी तैयार करते थे।

क्यूआर कोड तक जनरेट करते थे

एडीसीपी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए आरोपी उनमें क्यूआर कोड तक जनरेट कर देते थे। आशंका है कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल साइबर ठगी, बैंक खातों के संचालन, मोबाइल सिम जारी कराने और अन्य वित्तीय अपराधों में भी किया जा सकता था।

लैपटॉप में मिले सरकारी दस्तावेजों के टेंपलेट

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लैपटॉप में एडिट किए हुए एमसीडी के जन्म प्रमाण-पत्र, गैस एजेंसी से जुड़े दस्तावेजों और सेना के पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) के कई टेंपलेट मिले हैं। बरामद दस्तावेजों में वर्ष 1938 की जन्मतिथि वाला एक संदिग्ध जन्म प्रमाण-पत्र भी मिला है।

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महिला कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई

एडीसीपी ने बताया कि जांच में डाक विभाग की एक महिला कर्मचारी कोमल की भूमिका भी सामने आई है। वर्तमान में उसकी तैनाती नवयुग मार्केट स्थित मुख्य डाकघर में है। आरोप है कि कोमल कमीशन लेकर फर्जी दस्तावेजों के जरिये आधार कार्ड में संशोधन कराने में मदद करती थी। आरोपी प्रत्येक आधार संशोधन के बदले उसे अलग से भुगतान करते थे। कोमल की तलाश की जा रही है।

42 लोगों के फर्जी दस्तावेज बरामद

आरोपियों के कब्जे से 42 व्यक्तियों से संबंधित फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। आशंका है कि इन लोगों के आधार कार्ड में अवैध रूप से संशोधन कराया गया है। एडीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपी भाईयों ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है।

साइबर अपराध का जरिया बनते हैं फर्जी आधार कार्ड

एडीसीपी क्राइम ने बताया कि आधार कार्ड में फर्जी तरीके से नाम-पता या जन्मतिथि बदलने के बाद अपराधी नई पहचान तैयार कर लेते हैं। इसका इस्तेमाल बैंक खाते खुलवाने, सिम लेने, ठगी करने और सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभ लेने के लिए किया जाता है।

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