एसिड, बर्न पीड़ितों को मिलेगी नई पहचान; दिल्ली एम्स में होगा 'फेस ट्रांसप्लांट’
एम्स दिल्ली अगले एक साल में भारत का पहला फेस ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह सुविधा एसिड अटैक और गंभीर जलन के पीड़ितों के लिए होगी।

दिल्ली एम्स एसिड अटैक और बर्न पीड़ितों के लिए गुड न्यूज देने वाला है। दिल्ली एम्स का बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग 'फेस ट्रांसप्लांट’ की सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके लिए डॉक्टरों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। जल्द ही मरीजों की वेटिंग लिस्ट तैयार की जाएगी। यह सर्जरी उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जिनका चेहरा एसिड अटैक, गंभीर रूप से जलने या किसी हादसे में विकृत हो गया है।
बनाई जाएगी जरूरतमंद मरीजों की वेटिंग लिस्ट
एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि उनका विभाग चेहरा प्रत्यारोपण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस बारे में डाक्टरों का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। 'फेस ट्रांसप्लांट’ के लिए योग्य मरीजों की वेटिंग लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
एक साल में शुरू होगी सुविधा
विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो दिल्ली एम्स एक वर्ष में 'फेस ट्रांसप्लांट’ शुरू कर देगा। इसके बाद गनशॉट, इलेक्ट्रिक बर्न और एसिड अटैक जैसी घटनाओं में जिन लोगों का चेहरा खराब हो चुका है, उनका 'फेस ट्रांसप्लांट’ किया जा सकेगा।
चेहरा गंवा चुके लोगों को मिलेगी नई पहचान
अक्सर 10-15 सर्जरी के बाद भी मरीज जैसा चाहते हैं वैसा परिणाम नहीं मिल पाता और चेहरा बिगड़ा हुआ ही रहता है। ऐसे लोग न तो ठीक से खाना खा पाते हैं और न ही साफ बोल पाते हैं। उन्हें लगातार दर्द भी बना रहता है और इस कारण उनके जीवन की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। लेकिन दिल्ली एम्स में ऐसी सुविधा शुरू होने पर चेहरा गंवा चुके लोगों को नई पहचान मिलेगी।
दुनिया में अब 80 चेहरा प्रत्यारोपण
एम्स के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डाॅ. मनीष सिंघल ने बताया कि दुनिया में अब तक 80 चेहरा प्रत्यारोपण हुआ है। अमेरिका में सबसे ज्यादा हुआ है। एशिया में चीन और तुर्की में ऐसी सर्जरी हुई है। भारत में अब तक ऐसी कोई सर्जरी नहीं हुई है।
ब्रेन डेड कैडेवर डोनर की होती जरूरत
विशेषज्ञों की मानें तो 'फेस ट्रांसप्लांट’ के लिए ब्रेन डेड कैडेवर डोनर की जरूरत होती है। डोनर से मरीज का कलर, जेंडर और उम्र का भी मिलान होना जरूरी होता है। दान के दो घंटे में प्रत्यारोपण करना होता है।
जीवनभर लेनी होती है दवाएं
चेहरा प्रत्यारोपण के बाद त्वचा में संवेदनशीलता आने में करीब छह महीने लगते हैं। हालांकि मरीज को जीवन भर इम्युनोस्प्रेशन की दवाएं लेनी होती है।
16 से 40 घंटे तक का लगता है समय
सर्जरी में 16 से 40 घंटे तक का समय लगता है। सर्जरी दो चरणों में सर्जरी होती है। सर्जरी जटिल होने के साथ-साथ घंटों चलती है। गोली लगने से घायल मरीज, इलेक्ट्रिक बर्न के मरीजों चेहरा प्रत्यारोपण के योग्य होते हैं। एसिड अटैक पीड़ित, बर्न के मरीजों को भी फायदा होगा। प्रत्यारोपण के बाद चेहरा बदल जाएगा।




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