राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; 2 महीने में पूरे सूबे में नेशनल हाईवे से हटाएं अतिक्रमण
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से 2 महीने के भीतर सभी अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया है कि दुकानों और ढाबों जैसे अवैध निर्माणों को चिन्हित कर हटाया जाए।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सूबे के सभी नेशनल और स्टेट हाईवे से अवैध अतिक्रमण हटाने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने सरकार को 2 महीने का समय देते हुए कहा है कि सड़क के बीच से तय सीमा के अंदर बनी दुकानेंए ढाबे और होटल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इसके लिए जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से एक विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी जो इन निर्माणों को हटाएगी। अदालत ने साफ किया कि यदि लोग खुद अतिक्रमण नहीं हटाते तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। वहीं सरकार ने भी अदालत के आदेश का पालन करने का भरोसा दिया है।
2 महीने के भीतर कार्रवाई का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 2 महीने के भीतर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। अदालत ने गुरुवार को कहा कि राजमार्गों के पास बने अवैध निर्माण, दुकानें, ढाबे और होटल सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। ऐसे में प्रशासन को इन तमाम अतिक्रमणों की पहचान करके उनको हटा देना चाहिए।
एसटीएफ के गठन का भी आदेश
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के साथ मिलकर एक स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ भी बनाने का आदेश दिया ताकि पूरे राज्य में ऐसे अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जा सके।
प्रशासन लेगा ऐक्शन
अदालत के आदेश के अनुसार, यह टास्क फोर्स अतिक्रमणों की पहचान करेगी। साथ ही तय समय के भीतर उन्हें हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। अदालत ने साफ कहा कि सड़क सुरक्षा सबसे जरूरी है। किसी भी सूरत में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अतिक्रमणकारी खुद अवैध कब्जे या अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा।
अदालत में पेश करनी होगी रिपोर्ट
अदालत ने साफ किया कि सड़कों पर सुरक्षित चलना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। इसमें किसी भी तरह की बाधा गलत है। कार्रवाई में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग को सीमांकन के साथ ही पैमाइश करने को भी कहा गया है। दोनों ही विभागों को अदालत में रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने राज्य सरकार से भी अगली सुनवाई तक प्रगति रिपोर्ट मांगी है। राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिया गया है कि आदेश का पूरा पालन किया जाएगा। यही नहीं सरकार की ओर से तय समय में रिपोर्ट भी सौंपी जाएगी।




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