केजरीवाल-सिसोदिया को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची CBI, ये हैं 5 बड़े आधार
एजेंसी ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में अवैध बताया है। इस मामले की सुनवाई 9 मार्च को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में संभावित है। आइए जानते हैं कि CBI ने हाईकोर्ट में किन पांच प्रमुख आधारों पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में CBI ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 21 आरोपियों को डिस्चार्ज किए जाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। एजेंसी ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में अवैध बताया है। इस मामले की सुनवाई 9 मार्च को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में संभावित है। आइए जानते हैं कि CBI ने हाईकोर्ट में किन पांच प्रमुख आधारों पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
1. ‘मिनी-ट्रायल’ चलाने का आरोप
CBI का तर्क है कि आरोप तय करने के दौरान ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का विस्तृत मूल्यांकन कर मिनी-ट्रायल जैसा काम किया। एजेंसी के अनुसार, इस स्तर पर अभियोजन के सबूतों को बड़े संभावनाओं के आधार पर स्वीकार जाना चाहिए था, न कि गहन विश्लेषण के जरिए खारिज कर देना था।
2. तथ्यों और कानून का खंड-खंड मूल्यांकन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने साजिश के विभिन्न पहलुओं को अलग-थलग पढ़ा और अभियोजन के पूरे केस की चेन को नजरअंदाज किया। एजेंसी ने दावा किया- GoM की रिपोर्ट, जो कथित तौर पर सिसोदिया की कस्टडी में थी, वह ‘गायब’ हो गई। आबकारी विभाग के सीनियर अधिकारियों के बयान, टर्नओवर मानदंड में 500 करोड़ से 150 करोड़ की ढील तथा ‘साउथ ग्रुप’ द्वारा कथित 100 करोड़ रुपये की पहले से रिश्वत जैसी बातें साजिश की कड़ी को जोड़ती हैं।
3. अप्रूवर बयानों का मूल्यांकन
CBI ने कहा कि अप्रूवर और गवाहों के बयानों की वैधता ट्रायल के दौरान परखी जानी चाहिए। ट्रायल कोर्ट द्वारा इन्हें अप्रमाणित और परिवर्तित बयान बताकर खारिज करना सही नहीं है। एजेंसी ने यह भी कहा कि आयकर विभाग द्वारा जब्त रिकॉर्ड और आरोपियों की चैट इन एंट्रीज़ के बारे में बताती हैं।
4. जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश ‘चौंकाने वाला’
CBI ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश को “चौंकाने वाला” बताया है। इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की है। एजेंसी के मुताबिक, ऐसी प्रतिकूल टिप्पणियां तथ्यों और स्थापित कानून के विपरीत हैं।
5. केजरीवाल की भूमिका का गलत आकलन
CBI ने दलील दी कि केजरीवाल, पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री होने के नाते, नीति निर्माण और क्रियान्वयन की कथित आपराधिक साजिश में शुरू से शामिल थे। एजेंसी ने अप्रूवर बयानों के आधार पर दावा किया कि गोवा चुनाव के लिए पैसों की मांग और 90 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार के वित्तीय समर्थन का आश्वासन दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने हालांकि इन बयानों को प्रत्यक्ष नकद लेनदेन से न जुड़ा बताते हुए अपर्याप्त माना था। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।




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