Loss of a century, Veiled women mourn Iran Khamenei in Delhi Karbala एक सदी का नुकसान, वह हमारे पिता जैसे…; दिल्ली में खामनेई की मौत पर मातम मनातीं महिलाएं, Ncr Hindi News - Hindustan
More

एक सदी का नुकसान, वह हमारे पिता जैसे…; दिल्ली में खामनेई की मौत पर मातम मनातीं महिलाएं

महिलाओं ने यहां पहुंचकर ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत पर शोक जताया। काले अबाया और नकाब पहने महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। कुछ दुआएं पढ़ती दिखीं, तो कई की आंखें नम थीं।

Mon, 2 March 2026 04:31 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
एक सदी का नुकसान, वह हमारे पिता जैसे…; दिल्ली में खामनेई की मौत पर मातम मनातीं महिलाएं

दक्षिणी दिल्ली के जोर बाग स्थित शाह-ए-मर्दान करबला में रविवार शाम सैकड़ों महिलाएं एकट्ठा हुईं। महिलाओं ने यहां पहुंचकर ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत पर शोक जताया। काले अबाया और नकाब पहने महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। कुछ दुआएं पढ़ती दिखीं, तो कई की आंखें नम थीं।

86 साल के बुजुर्ग की क्या गलती थी?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मी नगर से आई जैबुन्निसा जैदी अपने परिवार के 6 सदस्यों के साथ पहुंचीं। हाथ में मोमबत्ती थामे उन्होंने कहा, “उन्होंने इंसानियत के लिए आवाज उठाई। एक 86 साल के बुजुर्ग की क्या गलती थी? अगर इंसानियत के साथ खड़ा होना जुर्म है, तो हम सब गुनहगार हैं।”

यह पूरी दुनिया का नुकसान है

गाजियाबाद की बीएससी फर्स्ट ईयर की छात्रा दिलकश ने बताया कि सुबह जैसे ही उन्हें निधन की खबर मिली, वे हक्का-बक्का रह गईं। दिलकश ने कहा- “वह हमारे रहबर थे, एक मार्गदर्शक। उन्होंने शिया और सुन्नी समुदाय को जोड़ने की बात की और हमेशा मजलूमों के साथ खड़े रहे। यह सिर्फ एक समुदाय का नहीं, पूरी दुनिया का नुकसान है।”

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:दुबई, ओमान, बहरीन, सऊदी, कतर पर हमला क्या इस्लाम के खिलाफ नहीं? निशिकांत दुबे
ये भी पढ़ें:खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध से झारखंड के हजारों परिवारों की सांसे अटकीं
ये भी पढ़ें:खामनेई की मौत के बाद जंतर-मंतर पर ईरान के समर्थन में जुटी भीड़, रोते नजर आए लोग

यह एक सदी का नुकसान,, वह हमारे पिता जैसे

सीरत अपनी एक साल की बेटी को गोद में लिए खड़ी थीं। भावुक आवाज में उन्होंने कहा, “यह एक सदी का नुकसान है। वह हमारे लिए पिता समान थे। ऐसा लग रहा है जैसे हमने अपने घर का कोई सदस्य खो दिया हो।” उनकी बहन शहाना ने बताया कि हमले की खबर आने के बाद परिवार ने खाना-पीना तक छोड़ दिया था और लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहा था।

हजारों किलोमीटर दूर की घटना पर दुख मनाती महिलाएं

न्यू अशोक नगर से आईं 53 वर्षीय निशात फातिमा अस्वस्थ होने के बावजूद श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुईं। उन्होंने कहा, “यह एक अमानवीय कृत्य था। यहां आना जरूरी था।” शाम ढलते ही मोमबत्तियों की रोशनी और दुआओं के बीच माहौल शांतिपूर्ण बना रहा। हजारों किलोमीटर दूर तेहरान से अलग, दिल्ली की इस सभा में मौजूद महिलाओं के लिए यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं, बल्कि निजी शोक का क्षण था।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।