घर खरीदारों से धोखाधड़ी करने वाली दिल्ली की कंपनी पर ED का शिकंजा; कुर्क की 206 करोड़ की संपत्ति
ED ने दिल्ली पुलिस और उसकी आर्थिक अपराध शाखा द्वारा कंपनी, उसके प्रमोटरों और मुख्य मैनेजर के खिलाफ दर्ज 26 FIR और चार्जशीट के आधार पर इस मामले में PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था।

दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी TDI इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने शुक्रवार को उसकी 206.4 करोड़ रुपए की नई अचल संपत्तियां कुर्क (अटैच) कर ली हैं। ईडी ने कंपनी के खिलाफ यह कार्रवाई हजारों घर खरीदारों के साथ की गई धोखाधड़ी के मामले में जांच के बाद की। ईडी पहले ही इस मामले में 45 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क कर चुकी थी और नए आदेश के बाद अस्थायी रूप से अटैच की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 251.88 करोड़ रुपए हो गया है।
ईडी ने बताया कि हाल ही में कुर्क की गई संपत्तियों में हरियाणा के सोनीपत के कामसपुर में स्थित 8.3 एकड़ जमीन और कई व्यवसायिक यूनिट्स शामिल हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि इन संपत्तियों का मालिकाना हक TDI इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (पहले इनटाइम प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड) और उसकी सहयोगी कंपनियों के पास है। बयान में बताया गया कि अटैच की गई सम्पत्तियों की कुल कीमत 206.4 करोड़ रुपए के आसपास है।
26 FIR के आधार पर दर्ज किया था PMLA का मामला
ED ने दिल्ली पुलिस और EOW (आर्थिक अपराध शाखा) द्वारा कंपनी, उसके प्रमोटरों और मुख्य मैनेजर के खिलाफ दर्ज 26 FIR और चार्जशीट के आधार पर इस मामले में PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। एजेंसी की जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने उनसे घर खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी की और उन्हें ठगा। वह तय समय में फ्लैट्स देने में नाकाम रहे, यहां तक कि एक प्रोजेक्ट में तो 16 से 18 साल बीत जाने के बाद भी ग्राहकों को उनके फ्लैट नहीं मिले।
अबतक अधूरा पड़ा है ‘पार्क स्ट्रीट’ नाम का प्रोजेक्ट
जांच में खुलासा हुआ कि TDI इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने साल 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 विभिन्न आवासीय और व्यवसायिक प्रोजेक्ट शुरू किए, इस दौरान उसने 14,105 ग्राहकों से एडवांस के तौर पर 4,619.43 करोड़ रुपए इकट्ठा कर लिए। ED का आरोप है कि इतने साल गुजरने के बाद भी 'पार्क स्ट्रीट' नाम का एक प्रोजेक्ट अबतक अधूरा है, वहीं चार अन्य प्रोजेक्ट के लिए अबतक ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं दिए गए हैं।
लोगों से मिले पैसों से लोन चुकाया व निवेश किया
ईडी की जांच में पाया गया कि कंपनी के प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स ने घर खरीदने वालों से मिले पैसों का इस्तेमाल हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के बजाय, अपनी सहयोगी कंपनियों को जमीन खरीदने और दूसरे कामों के लिए बतौर एडवांस भेज दिया। साथ ही ग्राहकों से मिले पैसों का इस्तेमाल कंपनी ने अपने लोन चुकाने और इन्वेस्टमेंट करने के लिए भी किया।
अबतक जब्त हो चुकी 251.88 करोड़ रुपए की संपत्ति
ED ने कहा है कि फंड की हेराफेरी की वजह से आखिरकार कंपनी के प्रोजेक्ट्स के निर्माण में देरी हुई, जिससे ग्राहकों को अपने फ्लैट्स या दुकानों का अधिकार समय पर नहीं मिल सका। एजेंसी इस मामले में अबतक कंपनी की कुल 251.88 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। ED की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देने के लिए कंपनी से तुरंत संपर्क नहीं हो सका है।




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