अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झंडे गाड़ेगी दिल्ली मेट्रो, विदेशों में काम हासिल करने के लिए बनाई नई कंपनी
अधिकारियों ने बताया कि ओवरसीज प्रोजेक्ट्स को पाने के लिए बनाई गई नई सहायक कंपनी DMIL मुख्यतः कंसल्टेंसी सर्विसेज, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) से संबंधित काम और मेट्रो व अर्बन-ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स से जुड़े लास्ट-माइल-कनेक्टिविटी बिजनेस ऑपरेशन्स पर फोकस करेगी।

देश में कई प्रोजेक्ट हासिल करने का बाद अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) भारत के बाहर भी अपनी धाक जमाने के मूड में है, इसके लिए उसने एक नई सहायक कंपनी 'दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड' (DMIL) का गठन किया है। इस नई सब्सिडियरी के गठन का मकसद बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह नई कंपनी DMRC को दुनिया के अन्य शहरों में मेट्रो-रेल प्रोजेक्ट्स के लिए सीधे बोली लगाने और शहरी-ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े कंसल्टेंसी का काम दिलाने में मदद करेगी।
एक अधिकारी ने कहा कि DMRC ने भारत से बाहर मेट्रो-रेल प्लानिंग, निर्माण और संचालन में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़े ठेके हासिल करने व व्यापार के मौके तलाशने की कोशिशों के तहत इस नई कंपनी का गठन किया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि DMRC अब भी बांग्लादेश में एक मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है, और वहां टेक्निकल सपोर्ट और कंसल्टेंसी दे रही है।
इजराइल में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए एक कदम आगे बढ़ी
DMRC के अनुसार उसने इजराइल में तेल अवीव मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए प्री-बिड प्रक्रिया के लिए सफलतापूर्वक क्वालिफाई कर लिया है और अन्य इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स जैसे इजिप्ट में एलेक्जेंड्रिया, वियतनाम में हो ची मिन्ह सिटी और मॉरिशस जैसे देशों में भी मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए वह बोली लगाने की प्रक्रिया में है।
विदेशों में मुख्यतः इन कामों पर होगा फोकस
अधिकारियों ने बताया कि ओवरसीज प्रोजेक्ट्स को पाने के लिए बनाई गई नई सहायक कंपनी DMIL मुख्यतः कंसल्टेंसी सर्विसेज, मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) से संबंधित काम और मेट्रो व अर्बन-ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स से जुड़े लास्ट-माइल-कनेक्टिविटी बिजनेस ऑपरेशन्स पर फोकस करेगी। इसके तहत मेट्रो के साथ-साथ अंतिम छोर तक पहुंच बनाने वाले परिवहन विकल्पों के संचालन पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कदम से दिल्ली मेट्रो को देश के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क्स में से एक को बनाने और उसका संचालन करने में अपने अनुभव का इस्तेमाल करने और ओवरसीज शहरों को अपनी विशेषज्ञता ऑफर करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक तकनीक SAP से होगा संचालन
DMRC के एक अधिकारी ने बताया कि सब्सिडियरी को ऑपरेशनलाइज करने के लिए, DMRC अपने मौजूदा SAP (सिस्टम्स, एप्लीकेशंस एंड प्रोडक्ट्स इन डेटा प्रोसेसिंग) पर अधारित अपने मौजूदा सिस्टम का ही विस्तार करेगी, जिसका इस्तेमाल अभी अलग-अलग एडमिनिस्ट्रेटिव और ऑपरेशनल फंक्शन्स को मैनेज करने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह सिस्टम फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्स, प्रोक्योरमेंट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़े ऑपरेशन्स को सपोर्ट करेगा, साथ ही पेरेंट ऑर्गनाइजेशन और सब्सिडियरी के बीच आसान कोऑर्डिनेशन भी पक्का करेगा।
अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम अलग-अलग डिपार्टमेंट्स तक सुरक्षित, रोल-बेस्ड एक्सेस देगा और सब्सिडियरी के कामकाज के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम के साथ एक पूरा ऑडिट ट्रेल बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से DMRC के इंटरनेशनल बिज़नेस ब्रांच के कामकाज को आसान बनाने में मदद मिलेगी, साथ ही यह विदेश में मेट्रो-रेल और अर्बन-ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स को ज़्यादा असरदार तरीके से आगे बढ़ा सकेगी।




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