दिल्ली के इन 10 इलाकों को जलभराव से मिलेगी मुक्ति! 177 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर, PWD मंत्री ने दी हरी झंडी
इन इलाकों के लोग सालों से भारी बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं। 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' के तहत ये प्रोजेक्ट्स दिल्ली के बरसाती नालों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और बारिश के पानी की निकासी को बेहतर करने का एक स्थायी समाधान हैं।

दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने शुक्रवार को कहा है कि रेखा गुप्ता सरकार दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। मंत्री ने उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में जलभराव की समस्या को खत्म करने के लिए कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय मंजूरी दी है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी के कुछ इलाकों में आधुनिक प्रीकास्ट आरसीसी ड्रेन तकनीक के जरिए जल निकासी नालियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा जिससे जलभराव की समस्या खत्म होगी। न्यू ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत इस प्रोजेक्ट के लिए 177 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
प्रवेश वर्मा ने कहा, 'इस प्रोजेक्ट के तहत ज्ञान शक्ति मंदिर मार्ग, छोटू राम मार्ग, आजादपुर कैंप चौक कॉरिडोर, सुल्तानपुरी, रोहिणी, नांगलोई रोड, महाराजा अग्रसेन मार्ग और कई अन्य प्रमुख रास्तों को कवर किया जाएगा, यहां लंबे समय से जल निकासी की व्यवस्था को सुधारने की जरूरत थी।'
निकासी व्यवस्था को अपग्रेड किया जाएगा
प्रोजेक्ट के तहत सुलतानपुरी मेन रोड से जलेबी चौक और जगदंबा रोड के मुख्य रास्तों पर नालों का नए सिर से निर्माण किया जाएगा। वहीं रोहिणी सेक्टर-16 और सेक्टर-17 जैसे मुख्य रास्तों पर निकासी व्यवस्था को अपग्रेड किया जाएगा। मंत्री ने कहा, 'इन इलाकों के लोग सालों से भारी बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या झेल रहे हैं। 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' के तहत ये प्रोजेक्ट्स दिल्ली के बरसाती नालों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और बारिश के पानी की निकासी को बेहतर करने का एक स्थायी समाधान साबित होंगे। जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार का फोकस सिर्फ पुनर्निर्माण पर ही नहीं बल्कि मौजूदा निकासी व्यवस्था को अपग्रेड करने पर भी है।
प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा
वहीं पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक काम की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इन प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। काम तय समय पर पूरा हो इसके लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इससे घनी आबादी वाले इलाकों में जलभराव की समस्या खत्म होगी और साथ ही जल निकासी भी पहले के मुकाबले बेहतर होगी।
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