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खुलासा! देश के खिलाफ जासूसी और साजिश में दुबई कनेक्शन आया सामने

देश के खिलाफ रची जा रही साजिश की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गाजियाबाद से पकड़े गए जासूसी मॉड्यूल के तार अब दुबई तक जुड़े मिले हैं। सैन्य ठिकानों के वीडियो, लोकेशन पाकिस्तान भेजने के आरोपियों ने गाजियाबाद से दो पार्सल दुबई भिजवाए थे। 

Fri, 20 March 2026 05:21 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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खुलासा! देश के खिलाफ जासूसी और साजिश में दुबई कनेक्शन आया सामने

देश के खिलाफ रची जा रही साजिश की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। गाजियाबाद से पकड़े गए जासूसी मॉड्यूल के तार अब दुबई तक जुड़े मिले हैं। सैन्य ठिकानों के वीडियो, लोकेशन पाकिस्तान भेजने के आरोपियों ने गाजियाबाद से दो पार्सल दुबई भिजवाए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने यहां से संवेदनशील डेटा दुबई के जरिये पाकिस्तान भिजवाया।

कौशांबी थाना पुलिस ने 14 मार्च को बिजनौर निवासी सुहेल मलिक उर्फ रोमियो (मुख्य हैंडलर), संभल निवासी साने इरम उर्फ महक और भोवापुर निवासी राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, रितिक गंगवार और प्रवीन को गिरफ्तार किया था। सात दिन की रिमांड के दूसरे दिन गुरुवार को अलग-अलग स्थानों पर आरोपियों से पूछताछ हुई। जांच में सामने आया है कि इसी साल जनवरी और फरवरी में सुहेल ने पाकिस्तान में बैठे सरदार के कहने पर गाजियाबाद से दो पार्सल दुबई भेजे थे। सूत्रों के अनुसार एक पार्सल में जूते और दूसरे में माउस था।

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दो अलग-अलग कोरियर ब्वॉय से भिजवाए पार्सल

एजेंसियों के मुताबिक, जूते के डिब्बे में संवेदनशील डेटा छिपा हो सकता है। माउस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। ऐसे में सभावना है कि डिजिटल फार्म में संवेदनशील डेटा भेजा गया हो। सुहेल ने दोनों पार्सल दो अलग-अलग कोरियर ब्वॉय से भिजवाए थे। पुलिस बुधवार को ही दोनों कोरियर ब्वॉय को हिरासत में ले चुकी है। सुहेल को पार्सल देने वाले के बारे में भी पुलिस को जानकारी मिली है। दुबई कनेक्शन सामने आने के बाद एनआईए और चौकन्ना हो गई है। एजेंसियों का अनुमान है कि एक साजिशकर्ता दुबई में भी है। अंदेशा यह भी है कि पाकिस्तान को सीधे भेजने के बजाय दोनों पार्सल वाया दुबई भेजे गए हैं।

दुर्गेश के जरिए नेटवर्क खंगाल रहे

जांच के दौरान जासूसी नेटवर्क में पाकिस्तान से फंडिंग की पुष्टि हुई है। इसी क्रम में पुलिस ने मुंबई बंदरगाह से दुर्गेश नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वह ट्रक चालक है और पाकिस्तान से हवाला और अन्य माध्यमों से आने वाली फंडिंग को गैंग के सदस्यों तक पहुंचाने का काम करता था।

दुर्गेश के जरिये अन्य बिचौलियों और फंडिंग नेटवर्क खंगालने की कोशिश की जा रही है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने करीब दो दर्जन संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की है। इनमें कई इलेक्ट्रीशियन हैं, जिन्हें संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने और तकनीकी सहयोग देने का काम सौंपा गया था। प्रारंभिक जांच में इनके भी जासूसी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। साक्ष्य जुटाकर इन सभी को भी जेल भेजा जा सकता है।

आरोपी जेल भेजे, मोबाइल से खुलेगा नेटवर्क

मसूरी थानाक्षेत्र के नाहल गांव से गिरफ्तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े छह आरोपियों को गुरुवार को पीसीआर अवधि पूरी होने के बाद जेल भेज दिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने मुख्य आरोपी के अलावा पांच अन्य आरोपियों के मोबाइल बरामद किए थे, लेकिन उनका डेटा डिलीट मिला।

अब फोरेंसिंक लैब से डेटा रिकवर कराने की तैयारी है। एजेंसियों ने खासतौर पर इस बात पर फोकस किया कि संगठन से और कौन-कौन लोग जुड़ने वाले थे, स्थानीय स्तर पर किस तरह का नेटवर्क तैयार किया जा रहा था और क्या आसपास के युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सूत्रों के मुताबिक दो दिन की गहन पूछताछ में आतंकी नेटवर्क, विदेशी संपर्क और संभावित साजिशों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।

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सोनीपत में पेड़ पर खुफिया कैमरा मिला

सोनीपत में पेड़ पर खुफिया कैमरा मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पुलिस ने इसे उतरवाकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सोनीपत बस अड्डे के पिछले वाले गेट के सामने सूखे पेड़ पर गुरुवार को एक कैमरा मिला, जिसे टेप से चिपकाया गया था। यहां अक्सर सवारियों की भीड़ रहती है। स्थानीय लोगों ने यह कैमरा देखा तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई। एक दिन पहले बुधवार को रेलवे स्टेशन के बाहर एक पेड़ पर भी इसी तरह का कैमरा मिला। उसे भी एक टेप से चिपकाया गया था। ये कैमरे किसने लगाए इस बारे में न तो नगर परिषद को कोई जानकारी है और न पुलिस प्रशासन को। दोनों कैमरे सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ वाले क्षेत्र में लगाए गए हैं। प्रशासन को सूचना देने के बाद इन कैमरों को उतरवा लिया गया है। पुलिस साइबर सेल इनकी जांच कर पता लगाएगा कि कैमरों से निगरानी हो रही थी या लाइव रिकार्डिंग। इनका संबंध कहां तक था, यह भी पता लगाया जाएगा।

सलीम वास्तिक को लेकर भी आरोपियों से हुई पूछताछ

गुरुवार को खोड़ा थाना और क्राइम ब्रांच से सभी छह आरोपियों को लोनी थाना ले जाया गया। यहां बीते माह सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले को लेकर आरोपियों से पूछताछ हुई। दोपहर तक सलीम के फोटो और मुठभेड़ में ढेर हुए आरोपियों के फोटो दिखाकर पूछताछ की गई। सूत्रों की मानें तो आरोपियों के सलीम से लिंक को लेकर कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिल पाई।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से लेकर गवाह भी तैयार

आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोपियों के खिलाफ काफी बड़े स्तर पर छानबीन चल रही है। पुलिस न सिर्फ आरोपियों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटा रही है, बल्कि गवाह भी तलाशे जा रहे हैं। आरोपियों के बारे में लोकल इनपुट से ही जानकारी मिली थी। सूत्रों की मानें तो आरोपियों का बचना लगभग असंभव है, क्योंकि साक्ष्य के साथ गवाहों की सूची भी लंबी होने वाली है।

हमजा की भूमिका पर जांच केंद्रित

जांच में पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर हमजा से संपर्क अहम बिंदु बना हुआ है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों की उससे बातचीत किस माध्यम से होती थी और क्या किसी हमले की ठोस योजना बनाई गई थी। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों, धार्मिक आयोजनों या किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाने की साजिश के एंगल पर भी जांच चल रही है। साथ ही फंडिंग के स्रोतों की भी गहन जांच की जा रही है। बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए संभावित फंडिंग की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पीसीआर के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर अलग-अलग टीमें विभिन्न पहलुओं की जांच में लगी हैं।

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