सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास लगा जासूसी कैमरा पकड़ा, PAK से रखी जाती थी नजर, NIA-ATS जांच में जुटीं
गाजियाबाद से पकड़े गए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह की साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है। कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी प्रवीन की निशानदेही पर बुधवार को हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में खंभे पर लगाए गए जासूसी कैमरे को बरामद कर लिया।

गाजियाबाद से पकड़े गए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह की साजिश धीरे-धीरे सामने आ रही है। गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी प्रवीन की निशानदेही पर बुधवार को हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में खंभे पर लगाए गए जासूसी कैमरे को बरामद कर लिया। गिरोह को देशभर में ऐसे 50 कैमरे लगाने का टारगेट मिला था।
पुलिस के मुताबिक, बरामद किया गया कैमरा रेलवे ट्रैक के पास एक ऊंचे खंभे पर लगाया गया था, ताकि ट्रेनों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। कैमरे में सोलर पैनल लगा होने के कारण इसे लगातार बिजली सप्लाई की जरूरत नहीं थी। इससे यह लंबे समय तक बिना किसी संदेह के काम करता रहा। आरोपी प्रवीन को इलेक्ट्रिकल और सर्विलांस उपकरण लगाने का अच्छा अनुभव था। उसके पिता इलेक्ट्रीशियन हैं और उसी के साथ काम करते हुए उसने कैमरे और वायरिंग से जुड़ा काम सीखा। इसी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल उसने जासूसी नेटवर्क के लिए किया। प्रवीन ने पुलिस को बताया कि उसे एक कैमरा लगाने के बदले 16 हजार रुपये दिए जाते थे। लोकेशन और तकनीकी निर्देश उसे पहले ही मिल जाते थे। कैमरे को इस तरह सेट किया जाता था कि उसका लाइव एक्सेस पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को मिल सके।
दिल्ली कैंट स्टेशन पर भी लगाया
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने सबसे पहले दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन को टारगेट बनाया था, जहां पहले ही एक कैमरा बरामद किया जा चुका है। इसके बाद सोनीपत रेलवे स्टेशन को चुना गया, जो उत्तर भारत की महत्वपूर्ण रेलवे लाइन में शामिल है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे स्टेशन इसलिए चुने गए क्योंकि यहां सुरक्षा बलों व ट्रेनों की आवाजाही और संवेदनशील गतिविधियां आसानी से कैद की जा सकती हैं।
सुरक्षा ठिकानों पर भी थी नजर
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि उन्हें देशभर में करीब 50 कैमरे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए उन्हें पाकिस्तान से फंडिंग मिल रही थी। गिरोह को सुरक्षा बलों के ठिकानों, सैन्य गतिविधियों वाले क्षेत्रों और रणनीतिक लोकेशनों के आसपास भी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे। दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक निगरानी का नेटवर्क तैयार करने की कोशिश थी।
सात दिन की पीसीआर में खुलेंगे और राज
कौशांबी पुलिस ने 14 मार्च को इस जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों सुहेल मलिक उर्फ रोमियो, साने इरम उर्फ महक, प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार को गिरफ्तार किया था। मंगलवार देर शाम आरोपियों को डासना जेल से पीसीआर पर लाकर गहन पूछताछ शुरू की गई। गाजियाबाद पुलिस, एनआईए और एटीएस की टीमें उनसे पूछताछ कर नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में अभी और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
स्थानीय एजेंसियों को जासूसी नेटवर्क की भनक नहीं लगी
आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तान के लिए जासूसी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद स्थानीय खुफिया विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। गाजियाबाद के मसूरी थानाक्षेत्र के नाहल गांव में जहां आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से प्रेरित नेटवर्क सक्रिय था तो वहीं कौशांबी के भोवापुर में जासूसी का सेंटर संचालित हो रहा था। स्थानीय सूचना तंत्र को दोनों गतिविधियों की भनक तक नहीं लगी।
जिहादी नाम से चर्चित है जासूसी नेटवर्क का मुख्य आरोपी सावेज
सूत्रों के अनुसार, नाहल गांव में सक्रिय नेटवर्क युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ने का काम कर रहा था। उन्हें आतंकी ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो दिखाकर धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लिया जा रहा था। इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी सावेज इलाके में जिहादी नाम से चर्चित है, जिसका जिक्र पुलिस ने भी किया है। इसके बावजूद स्थानीय खुफिया विभाग ने उसकी पृष्ठभूमि खंगालने या गतिविधियों की निगरानी करने की जहमत तक नहीं उठाई। दूसरी ओर, भोवापुर में जासूसी का एक संगठित तंत्र विकसित हो चुका था। यहां से पाकिस्तान में बैठे आकाओं को संवेदनशील ठिकानों, खासकर हिंडन एयरबेस से संबंधित फोटो और वीडियो भेजे जा रहे थे। इतना ही नहीं, स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से जासूसी की ट्रेनिंग भी दी जा रही थी।




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