'फांसी घर' विवाद: विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए केजरीवाल, बोले- स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रही सरकार
यह मामला मौजूदी विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उठाया था। वहीं शीतकालीन सत्र के दौरान लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा था कि 2022-23 के दौरान 'फांसी घर' पर लगभग 1.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़ला ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश होकर 'फांसी घर' विवाद पर अपना पक्ष रखा। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने बीते दिनों 6 मार्च को समिति के सामने पेश होने की पुष्टि की थी। वे इससे पहले कई बार बुलाने के बावजूद समिति के सामने पेश नहीं हुए थे जिसके चलते बीजेपी उनपर हमलावर थी।
समिति के समक्ष पेश होने के बाद केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी की सरकार फिजूल की बातों पर समय खराब कर रही है, इन्हें दिल्ली की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि 'साल 2022 में मालूम हुआ कि दिल्ली विधानसभा में एक फांसी घर है। अब बीजेपी सरकार कह रही है कि यह फांसी घर नहीं बल्कि टिफिन रूम है। यह देश के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। आज दिल्ली पानी के बढ़े हुए बिलों, गंदे पानी, स्कूलों की बढ़ी फीस और प्रदूषण से परेशान है लेकिन इन मुद्दों पर बात नहीं की जा रही है। मुझे बड़ी खुशी होती जब कोई समिति मुझे दिल्ली के कामों पर चर्चा करने के लिए बुलाती, मैं भी अपने सुझाव देता लेकिन यह लोग फिजूल की बातों पर समय खराब कर रहे हैं, इन्हें दिल्ली की चिंता नहीं है।'
'स्वतंत्रता सेनानियों का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता'
केजरीवाल ने आगे कहा ‘दिल्ली विधानसभा का जो परिसर है वह एक एतिहासिक बिल्डिंग है। अंग्रेजों के जमाने में 1912 में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ट्रांसफर की गई थी तो उस वक्त ये बिल्डिंग बनाई गई थी। इस बिल्डिंग में 2022 में तत्कालीन स्पीकर रामनिवास गोयल के प्रयास से ये पता चला कि एक कोने में फांसी घर था। उस कोने में स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। तत्कालीन स्पीकर ने मुझे बुलाया और सुझाव दिया कि इसे हमें टूरिस्ट के लिए खोलना चाहिए ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सकें। इसके बाद हमने उसका उद्घाटन किया। लेकिन जब से इनकी सरकार आई है ये साबित करने में लगे हुए हैं कि वो फांसी घर नहीं बल्कि टिफिन रूम था। मैं समझता हूं कि स्वतंत्रता सेनानियों का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता।’
केजरीवाल ने समिति से ही मांगे सबूत
उन्होंने बताया कि 'मुझे आज विधानसभा में बुलाया गया था और कहा गया कि साबित करिए कि वह फांसी घर है। तो मैंने कहा कि तत्कालीन स्पीकर ने सभी जांच करने के बाद ये किया था लेकिन आप ये बताइए कि आपके पास क्या सबूत है कि वो एक टिफिन रूम था? उनके पास कोई सबूत नहीं था जिसका मतलब ये जानबूझकर स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करने के लिए ये साबित करने में लगे हुए हैं कि वह फांसी घर नहीं बल्कि टिफिन रूम था।'
विजेंद्र गुप्ता ने उठाया था ये मुद्दा
आपको बता दें कि यह मामला मौजूदी विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उठाया था। वहीं शीतकालीन सत्र के दौरान लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा था कि 2022-23 के दौरान 'फांसी घर' पर लगभग 1.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
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