दिल्ली के स्कूलों में रील और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगी रोक, जारी हुआ सर्कुलर; सिर्फ इस तरह के कंटेट को हरी झंडी
छात्रों के साथ-साथ निर्देश शिक्षकों और अन्य स्टाफ सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होंगे। निर्देश न मानने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही गई है। सरकार के संज्ञान में आया था कि रील्स और शार्ट वीडियो बनाए जाने से स्कूल परिसर में शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्कूल अवधि के दौरान रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। छात्रों के साथ-साथ निर्देश शिक्षकों और अन्य स्टाफ सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होंगे। सरकार ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्टाफ स्कूल परिसर में रील्स और शॉर्ट वीडियो न बनाएं। विशेषकर पढ़ाई के समय के दौरान। यानी राजधानी के स्कूलों में अब मनोरंजन या सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है। सर्कुलर में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियां शैक्षणिक कार्य, अनुशासन या संस्थानों की गरिमा पर असर डालती हैं।
दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) की ओर से इस संबंध में सर्कुलर जारी किया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए शॉर्ट वीडियो (रील) बनाई जा रही हैं स्कूल प्रशासन को पढ़ाई के घंटों के दौरान इस पर सख्ती से रोक लगानी होगी। सर्कुलर में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों से पढ़ाई पर असर पड़ता है। स्कूलों को छात्रों का ध्यान भटकाने वाली ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जानी चाहिए और शिक्षण संस्थानों की गरिमा को बनाए रखा जाना चाहिए। सर्कुलर में ये भी कहा गया है कि स्कूल में सभी का ध्यान पढ़ाई पर होना चाहिए।
केवल शैक्षिक वीडियो की अनुमति
विभाग ने कहा है कि पढ़ाई, संस्कृति या जागरूकता से जुड़ा विषयों पर वीडियो अनुमति के बाद बनाए जा सकते हैं। इसके लिए अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। ऐसे वीडियो शिक्षकों की देखरेख में ही बनाए जाएंगे। साथ ही, यह भी ध्यान रखना होगा कि पढ़ाई में कोई बाधा न आए और बच्चों की सुरक्षा और प्राइवेसी बनी रहे। सर्कुलर में यह भी कहा गया कि स्कूल परिसर में कोई भी अनुपयुक्त, गैर-शैक्षणिक या प्रचार सामग्री रिकॉर्ड नहीं की जानी चाहिए।
निर्देश न मानने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त एक्शन
सर्कुलर में कहा गया है कि सभी स्कूलों, टीचर्स और छात्रों को इस निर्देश की जानकारी दी जाए। इसके साथ ही निर्देश का उल्लंघन न हो इसका भी ध्यान रखने के लिए कहा गया है। सर्कुलर में निर्देश न मानने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात कही गई है।
क्यों जारी किए गए निर्देश
सरकार के संज्ञान में आया था कि रील्स और शार्ट वीडियो बनाए जाने से स्कूल परिसर में शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। छात्रों का ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। शिक्षण संस्थानों की गरिमा और अनुशासन में कमी आ रही है।
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